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BRICS देशों के बीच व्यापार की बाधाएं हटी तो भारत को होगा बड़ा फायदा, इंजीनियरिंग निर्यात को मिल सकती है नई रफ्तार

EEPC India: BRICS देशों के बीच नॉन-टैरिफ बाधाएं हटाने और स्थानीय मुद्राओं में आसान पेमेंट सिस्टम बनाने से भारत के इंजीनियरिंग निर्यात को फायदा मिल सकता है। EEPC इंडिया ने कहा कि इससे भारतीय निर्यातकों की करीब 75 प्रतिशत समस्याएं दूर हो सकती हैं।
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भारत

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Gajanand Prajapat

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Updated: 13 Sep 2026, 3:05 PM IST

EEPC India On BRICS Summit 2026

BRICS देशों के नेता (फोटो- IANS)

BRICS Summit 2026: दिल्ली में चल रहे 18 वें BRICS समिट में देश की इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने वाली संस्था इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद (EEPC India) का कहना है कि कुछ ऐसे कदम है, जिनको उठाकर भारत निर्यात की लगभग 75 फीसदी समस्याओं का समाधान कर सकता है। ईईपीसी के चेयरमैन का कहना है कि अगर ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार को आसान बनाने के लिए नॉन-टैरिफ बैरियर्स हटाए जाते हैं और स्थानीय मुद्राओं में आसान पेमेंट सिस्टम बनाया जाता है तो भारत के इंजीनियरिंग निर्यात को बड़ा फायदा मिल सकता है।

75% समस्याएं हो सकती हैं दूर

ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि भारतीय एक्सपोर्टर्स को होने वाली करीब 75 प्रतिशत समस्याओं को नॉन-टैरिफ बाधाएं कम करके और अलग-अलग देशों की अपनी मुद्रा में तेज और प्रभावी भुगतान व्यवस्था लागू करके हल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए अब इन मुद्दों पर केवल चर्चा नहीं, बल्कि उन्हें लागू करने की जरूरत है।

एक जैसे नियम और स्टैंडर्ड्स बनाने की जरूरत

पंकज चड्ढा के अनुसार, ब्रिक्स देशों के बीच नॉन-टैरिफ बाधाओं को लेकर एक आम समझौता किया जा सकता है। सदस्य देश कुछ साझा स्टैंडर्ड्स पर सहमति बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई देशों में नॉन-टैरिफ उपायों के कारण एक्सपोर्ट की लागत टैरिफ की तुलना में ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए व्यापार करने वाले देशों के बीच रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।

भारत के लिए क्यों है यह मुद्दा अहम?

भारत के कुल वस्तु निर्यात में इंजीनियरिंग प्रोडक्ट की हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत है। ब्रिक्स देशों में ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के प्रमुख बाजार हैं। ईईपीसी इंडिया के अनुसार, भारत 1950 के दशक में केवल 10 मिलियन डॉलर का इंजीनियरिंग निर्यात करता था, जो अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान बढ़कर 122.43 अरब डॉलर तक पहुंच गया। ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम होना भारत के इंजीनियरिंग निर्यात के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

वैश्विक व्यापार में BRICS की हिस्सेदारी करीब एक-चौथाई

ब्रिक्स समूह इस समय वैश्विक व्यापार के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में यदि सदस्य देश नॉन-टैरिफ बाधाएं कम करने और भुगतान प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में सफल होते हैं, तो वैश्विक व्यापार में समूह की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है।

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