
Farooq Abdullah : फारूक अब्दुल्ला बोले— पीओजेके के हालात पर केंद्र क्यों खामोश? (फोटो सोर्स : PTI_News)
Centre Silence on PoJK: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में बीते कुछ समय से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। महंगाई, बुनियादी अधिकारों की कटौती और पाकिस्तानी सेना की सख्त कार्रवाई के खिलाफ वहां की जनता सड़कों पर है। इसी बीच भारत की घरेलू राजनीति में भी इस मुद्दे पर घमासान तेज हो गया है। नेशनल कांफ्रेंस (NC) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार की इस पूरे मामले पर चुप्पी को लेकर कड़े सवाल खड़े किए हैं।
फारूक अब्दुल्ला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर केंद्र सरकार लगातार यह दोहराती है कि PoJK भारत का अटूट हिस्सा है, तो फिर वहां के नागरिकों पर हो रहे अत्याचारों पर चुप्पी क्यों साधी गई है?
"जब-जब बात आती है, आप (केंद्र सरकार) कहते हैं कि PoJK हमारा हिस्सा है। अगर वह वाकई आपका हिस्सा है, तो फिर आप उस पर खुलकर बात क्यों नहीं करते? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को इस मुद्दे पर वैश्विक मंचों और सरकार के स्तर पर मजबूती से आवाज उठानी चाहिए।"
नेशनल कांफ्रेंस प्रमुख ने केवल केंद्र पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान भी PoJK के बदतर होते हालात की ओर आकर्षित किया:
संयुक्त राष्ट्र से अपील: अब्दुल्ला ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHRC) से गुहार लगाई है कि वह एक प्रतिनिधिमंडल भेजकर PoJK में जारी मानवीय संकट का जायजा ले।
नागरिकों की सुरक्षा: उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार जो लोग कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
PoJK में पिछले कुछ महीनों से स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी हुई है। जनता में भारी असंतोष है और विरोध प्रदर्शन चरम पर हैं:
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में PoJK के मुजफ्फराबाद, रावलाकोट और मीरपुर जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर नागरिक आंदोलन चल रहे हैं। बिजली दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी, खाद्य संकट और राजनीतिक अधिकारों के हनन के खिलाफ उठे इस आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग की खबरे सामने आई हैं।
भारत सरकार का आधिकारिक और स्पष्ट रुख रहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है। वर्ष 1994 में भारतीय संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में भी यह संकल्प दोहराया गया था कि पाकिस्तान को उसके अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों को खाली करना होगा। विदेश मंत्रालय (MEA) भी समय-समय पर यह स्पष्ट करता रहा है कि PoJK में हो रहे प्रदर्शन वहां इस्लामाबाद के दशकों पुराने प्रशासनिक शोषण का सीधा नतीजा हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फारूक अब्दुल्ला का यह बयान केंद्र सरकार को घेरने के साथ-साथ PoJK के मुद्दे को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने की एक सोची-समझी रणनीति है। उनका मानना है कि यदि भारत PoJK पर अपना दावा मजबूत रखना चाहता है, तो उसे वहां के नागरिकों के मानवाधिकारों के उल्लंघन पर भी अपनी स्पष्ट और मुखर प्रतिक्रिया देनी होगी।
Updated on:
29 Jul 2026 03:19 pm
Published on:
29 Jul 2026 02:47 pm
