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शिबू सोरेन के साथ झारखंड को बिहार से अलग करवाने वाले ‘माधव लाल’ अब नहीं रहे, 75 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

Madhav Lal Singh Gomia MLA Passed Away: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, गोमिया के पूर्व विधायक और अविभाजित बिहार सरकार के साथ-साथ राज्य गठन के बाद झारखंड सरकार में मंत्री रहे माधव लाल सिंह के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है।

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माधव लाल सिंह का निधन

Madhav Lal Singh Death: झारखंड के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता माधव लाल सिंह का बुधवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। सिंह का रांची के बरियातू स्थि​त पल्स अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनके निधन से राज्य के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। माधव लाल सिंह ने निधन पर प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शोक व्यक्त किया है। साथ ही मुख्यमंत्री ने राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने का अधिकारियों को निर्देश दिया है।

बताया जा रहा है कि बीते दिनों सिंह की तबीयत काफी बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए बोकारो से रांची लाया गया था। डॉक्टरों की एक टीम द्वारा लगातार इलाज और निगरानी के बावजूद, उन्हें बचाया नहीं जा सका।

गोमिया विधानसभा क्षेत्र से 4 बार विधायक

बोकारो जिले के एक प्रमुख राजनीतिक हस्ती, माधव लाल सिंह ने गोमिया विधानसभा क्षेत्र का चार बार प्रतिनिधित्व किया; उन्होंने 1985, 1990, 2000 और 2009 में चुनाव जीते थे। अविभाजित बिहार के दौर से लेकर झारखंड राज्य के गठन तक, वे क्षेत्रीय चिंताओं और जनहित के मुद्दों पर हमेशा मुखर रहे। अपने लंबे राजनीतिक करियर के दौरान, उन्होंने बिहार और झारखंड, दोनों सरकारों में मंत्री के रूप में कार्य किया। उन्होंने झारखंड राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष का पद भी संभाला था। वे लगभग 75 वर्ष के थे।

सीएम हेमंत सोरेन ने जताया दुख

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया और एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'गोमिया के पूर्व विधायक और अविभाजित बिहार सरकार के साथ-साथ राज्य गठन के बाद झारखंड सरकार में मंत्री रहे माधव लाल सिंह के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने लंबे समय तक जनसेवा और सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। माधव बाबू का निधन सार्वजनिक जीवन के लिए एक अपूरणीय क्षति है।' मुख्यमंत्री ने आगे दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार के सदस्यों तथा समर्थकों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थना की।

'जमीन से जुड़े नेता को खो दिया'

झारखंड की राजनीति में एक जमीनी नेता के रूप में पहचाने जाने वाले सिंह कई जन आंदोलनों से गहराई से जुड़े रहे, विशेष रूप से गोमिया क्षेत्र में। उन्हें ग्रामीण इलाकों में व्यापक जनसमर्थन प्राप्त था और उन्हें एक सरल, सुलभ और ईमानदार नेता के रूप में काफी सम्मान दिया जाता था। मंत्री पदों पर रहने के बावजूद, उन्होंने एक विनम्र जन प्रतिनिधि की अपनी छवि को बनाए रखा। कई स्थानीय निवासी उन्हें एक राजनेता से कहीं अधिक एक अभिभावक के रूप में देखते थे।