
पूर्व जज गौतम पटेल (फाइल फोटो)
Gautam Patel Dawoodi Bohra Judgment Threats: बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गौतम पटेल ने दावा किया है कि दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार विवाद में दिए गए अपने फैसले के बाद से उन्हें और उनके परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं। पटेल का कहना है कि पिछले करीब 10 महीनों से उन्हें देश छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है और हाल ही में लंदन में उनकी बेटी पर हमला भी हुआ।
पूर्व जज ने यह भी आरोप लगाया कि धमकी भरे पत्रों में उनसे 2024 में दिए गए अपने फैसले को सार्वजनिक रूप से गलत बताने और उसे वापस लेने जैसी मांगें की गई हैं।
गौतम पटेल ने अप्रैल 2024 में दाऊदी बोहरा समुदाय के आध्यात्मिक प्रमुख के उत्तराधिकार से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद पर फैसला सुनाया था। अपने फैसले में उन्होंने सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को दाऊदी बोहरा समुदाय का वैध आध्यात्मिक प्रमुख माना था।
यह मामला सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन के निधन के बाद उत्तराधिकार को लेकर शुरू हुआ था। पहले खुजैमा कुतुबुद्दीन ने इस दावे को चुनौती दी थी। उनके निधन के बाद उनके बेटे ताहेर फखरुद्दीन ने अदालत में दावा जारी रखा था। अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद फैसला सैफुद्दीन के पक्ष में दिया था।
गौतम पटेल के मुताबिक, अगस्त 2025 में लंदन स्थित उनकी बेटी और दामाद के घर में घुसने की कोशिश की गई थी। इसके कुछ समय बाद एक धमकी भरा पत्र मिला, जिसमें उनके दाऊदी बोहरा मामले के फैसले का सीधा उल्लेख किया गया था।
पटेल का दावा है कि पत्र में उन्हें देश छोड़ने, किसी अज्ञात स्थान पर जाने और यूट्यूब पर वीडियो जारी कर अपने फैसले को गलत बताने के लिए कहा गया। साथ ही बार एसोसिएशन और अदालत में जाकर भी फैसले के खिलाफ बयान देने की मांग की गई। उन्होंने कहा कि यह सब उनके रिटायर होने के करीब डेढ़ साल बाद शुरू हुआ, जो बेहद चिंताजनक है।
पूर्व जज के अनुसार, पत्र भेजने वालों ने खुद को दाऊदी बोहरा समुदाय के प्रभावशाली लोगों का समूह बताया है। पत्र में आरोप लगाया गया कि फैसला भ्रष्टाचार और दबाव में दिया गया था।
धमकी देने वालों ने कथित तौर पर चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो उन्हें और उनके परिवार को नुकसान पहुंचाया जाएगा। पत्रों में आपराधिक गिरोह की मदद लेने का भी दावा किया गया है।
गौतम पटेल की बेटी अदिति पटेल ने बताया कि 22 अप्रैल को वह अपने बच्चे को स्कूल छोड़कर लौट रही थीं, तभी एक नकाबपोश व्यक्ति ने पीछे से उन पर हमला कर दिया। हमलावर ने उनके चेहरे पर कई बार मुक्के मारे, जिससे उनकी नाक की हड्डी टूट गई। शोर सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे तो आरोपी वहां से भाग गया।
परिवार का कहना है कि स्थानीय पुलिस इस हमले को पहले मिली धमकियों से जोड़कर देख रही है और इसे सामान्य लूटपाट या सड़क अपराध नहीं मान रही।
हमले के कुछ समय बाद परिवार को एक और पत्र मिला। पटेल के अनुसार, इसमें पहले से भी ज्यादा गंभीर धमकियां दी गईं। पत्र में कथित तौर पर लिखा था कि उन्हें पहले ही पर्याप्त चेतावनी दी जा चुकी है और अब अगला कदम और खतरनाक हो सकता है। परिवार को भेजे गए लिफाफे में एक एसडी कार्ड भी था। दावा किया गया कि उसमें पहले की घटनाओं से जुड़े वीडियो मौजूद थे।
गौतम पटेल ने बताया कि उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी मुंबई पुलिस को दी है। वहीं ब्रिटेन में भी स्थानीय पुलिस को शिकायत दी गई थी।
उन्होंने कहा कि फिलहाल भारत में उनके साथ कोई घटना नहीं हुई है, लेकिन परिवार को लेकर चिंता बनी हुई है। उनकी पत्नी को भी मुंबई में इसी तरह का धमकी भरा पत्र मिलने की बात सामने आई है।
पूर्व जज पटेल का कहना है कि यह मामला केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है बल्कि न्यायिक व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई न्यायाधीश अपना काम ईमानदारी से करने के बाद इस तरह की धमकियों और हमलों का सामना करता है तो भविष्य में न्यायाधीश स्वतंत्र रूप से फैसले कैसे दे पाएंगे। पटेल ने कहा कि न्यायाधीशों और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।
मामले को लेकर बॉम्बे बार एसोसिएशन ने भी चिंता जताई है। एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव पारित कर पूर्व न्यायाधीश गौतम पटेल और उनके परिवार के खिलाफ कथित धमकियों, उत्पीड़न और हिंसक घटनाओं की कड़ी निंदा की है।
एसोसिएशन ने कहा कि किसी न्यायाधीश को उनके न्यायिक कर्तव्यों के निर्वहन के कारण निशाना बनाना बेहद गंभीर मामला है और संबंधित एजेंसियों को इसकी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
पूर्व जज ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए वह फिलहाल लंदन में ही रहने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित एजेंसियां मामले की गंभीरता को समझते हुए आवश्यक कार्रवाई करेंगी।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्यायाधीशों की सुरक्षा को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों और पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है।
Published on:
08 Jun 2026 07:46 pm
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