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Nepal Flood: नेपाल की बाढ़ के बाद अलर्ट हुआ भारत, हिमालय से सटे राज्यों को लेकर दिल्ली में हाईलेवल बैठक

Himalayan Flood Risk: नेपाल की बाढ़ के बाद भारत अलर्ट हो गया है। दिल्ली में हाईलेवल बैठक में हिमालय से सटे राज्यों में ग्लेशियल झीलों और हिमस्खलन के खतरे से निपटने की तैयारियों की समीक्षा हुई।
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भारत

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Rahul Yadav

Sep 03, 2026

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हिमालय से सटे राज्यों को लेकर दिल्ली में हाईलेवल बैठक (सांकेतिक फोटो - चैटजीपीटी)

Govind Mohan GLOF Meeting: नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ से हुई तबाही के बीच भारत भी सतर्क हो गया है। केंद्र सरकार ने हिमालय से सटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्लेशियल झीलों के फटने से आने वाली बाढ़ और हिमस्खलन के खतरे को लेकर तैयारियों की समीक्षा की है। गृह सचिव गोविंद मोहन ने गुरुवार को नई दिल्ली में हाईलेवल बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में हिमालयी क्षेत्र में बदलते खतरे और उससे निपटने की तैयारियों पर चर्चा हुई। खास तौर पर संवेदनशील ग्लेशियल झीलों, बर्फ से ढके इलाकों और हिमस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया।

ग्लेशियल झीलों और हिमस्खलन पर नजर

गृह मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में ग्लेशियल झील के फटने से आने वाली बाढ़ यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड के खतरे की समीक्षा की गई। इसके साथ ही हिमस्खलन की आशंका वाले इलाकों पर भी चर्चा हुई। गृह सचिव ने संवेदनशील ग्लेशियल झीलों और हिमस्खलन वाले क्षेत्रों की लगातार और सक्रिय निगरानी पर जोर दिया। बैठक में खतरे वाले स्थानों की पहचान करने के साथ-साथ संभावित पानी के बहाव के रास्तों की जानकारी पहले से तैयार रखने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को कहा गया कि बर्फ से ढके इलाकों और संवेदनशील ग्लेशियल झीलों में किसी भी बदलाव पर लगातार नजर रखी जाए।

बैठक में चेतावनी जारी करने की व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को कहा गया कि किसी खतरे की जानकारी मिलने के बाद अलर्ट राज्य एजेंसियों, जिला प्रशासन और स्थानीय स्तर तक जल्द पहुंचाया जाए। इससे जरूरत पड़ने पर लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकेगा।

जिलों और स्थानीय स्तर पर तैयारी के निर्देश

केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि केवल आपदा आने के बाद राहत और बचाव की तैयारी पर्याप्त नहीं है। इसके बजाय पहले से जोखिम की पहचान कर रोकथाम के उपाय किए जाने चाहिए। इसके साथ ही समुदाय स्तर पर भी लोगों को संभावित खतरे और उससे बचाव के तरीकों के बारे में तैयार किया जाना चाहिए। राज्य एजेंसियों, जिला प्रशासन और वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल रखने को कहा गया है। गृह मंत्रालय ने कहा कि चेतावनी मिलने के बाद उस पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी आपदा तैयारियों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। शुरुआती चेतावनी और लोगों को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था में अगर कोई कमी है तो उसे पहले ही दूर करने को कहा गया है। आपात स्थिति में राहत और बचाव के लिए जरूरी संसाधनों और प्रतिक्रिया व्यवस्था को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया।

2024 में मंजूर परियोजनाओं में तेजी लाने को कहा

गृह सचिव ने राज्यों से ग्लेशियल झीलों से आने वाली बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 2024 में मंजूर की गई परियोजनाओं में तेजी लाने को कहा। इन परियोजनाओं का मकसद संवेदनशील इलाकों में खतरे को कम करना और समय रहते चेतावनी देने की व्यवस्था मजबूत करना है। बैठक में नियमित तौर पर खतरे से जुड़ी जानकारी साझा करने और आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए।

किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने लिया हिस्सा?

बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, केंद्रीय जल आयोग, भारत मौसम विज्ञान विभाग और रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।

राज्यों ने अपने-अपने इलाकों में ग्लेशियल झीलों की निगरानी, बर्फ से ढके और हिमस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों की निगरानी, शुरुआती चेतावनी व्यवस्था, चेतावनी को स्थानीय लोगों तक पहुंचाने, संभावित बाढ़ के रास्तों की योजना, समुदाय स्तर की तैयारी और राहत-बचाव संसाधनों की तैनाती से जुड़ी अपनी तैयारियों और जोखिम कम करने के उपायों की जानकारी दी। बैठक में इस बात पर जोर रहा कि हिमालयी इलाकों में किसी भी बड़े प्राकृतिक खतरे की पहले से पहचान हो। समय रहते चेतावनी जारी की जाए। राज्य और जिला स्तर की एजेंसियां उस चेतावनी पर तुरंत कार्रवाई करें। इससे संवेदनशील इलाकों में जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकेगा।