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देश में पर्यावरण संरक्षण (Environmental Conservation in the Country) को नई गति देने के उद्देश्य से 2025 में लागू किए गए ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (Green Credit Programme) ने जमीनी स्तर पर असर दिखाना शुरू कर दिया है। पर्यावरण संरक्षण कानून (Environmental Protection Law) के तहत शुरू की गई इस पहल के अंतर्गत अब तक 12 राज्यों में पारिस्थितिकी बहाली के कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न राज्यों में बहाली किए गए क्षेत्र (हेक्टेयर में) के आधार पर गुजरात शीर्ष पर उभरकर सामने आया है।
गुजरात में अब तक 975 हेक्टेयर क्षेत्र में पर्यावरण बहाली का कार्य किया जा चुका है, जो अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है। यह प्रदर्शन न केवल राज्य की सक्रिय पर्यावरण नीति को दर्शाता है, बल्कि औद्योगिक विकास (Industrial development) और हरित संतुलन (Green Balance) के बीच बेहतर तालमेल का संकेत भी देता है। दूसरे स्थान पर मध्य प्रदेश है, जहां 670 हेक्टेयर क्षेत्र में पर्यावरण बहाली का कार्य पूरा हुआ है।
प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर छत्तीसगढ़ भी पर्यावरण बहाली की सूची में 561 हेक्टेयर के साथ अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। वहीं, बिहार में 461 हेक्टेयर भूमि पर पर्यावरण बहाली का काम पूरा किया जा चुका है। पूर्वोत्तर भारत (Northeast India) के प्रहरी माने जाने वाले असम में भी 454 हेक्टेयर पर पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को सुधारने की प्रक्रिया चल रही है।
ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था है जहां कंपनियों, स्थानीय निकायों और व्यक्तियों को उनके पर्यावरण के अनुकूल कार्यों के लिए 'क्रेडिट' दिया जाता है। इसे एक व्यापारिक मॉडल के रूप में विकसित किया गया है, ताकि निजी और सार्वजनिक भागीदारी के माध्यम से पारिस्थितिकी को फिर से बहाल किया जा सके।
गुजरात का प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है बड़े पैमाने पर औद्योगिक गतिविधियां संचालित होने के बावजूद राज्य ने पर्यावरण बहाली में अग्रणी स्थान हासिल किया है। खासतौर पर सूरत और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में हरित परियोजनाओं को प्राथमिकता (Priority to Green Projects) देने के प्रयासों का असर इन आंकड़ों में दिखाई देता है।
सूरत के पर्यावरणविद डॉ. कपिला मनोज के मुताबिक, यदि इसी गति से ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम का विस्तार किया गया तो आने वाले वर्षों में यह भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं (Climate Commitments) को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है। साथ ही, यह कार्यक्रम स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है।
Published on:
22 Apr 2026 03:20 am
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