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Green Credit Programme: 12 राज्यों में उद्योग और पर्यावरण के संतुलन ने पकड़ी रफ्तार, ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम में टॉप पर गुजरात

भारत में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (Green Credit Programme) चला रही है। इस प्रोग्राम के तहत जमीनी स्तर पर औद्योगिक विकास (Industrial development) और हरित संतुलन (Green Balance) दिखने लगा है।

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भारत

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Vinay Shakya

Apr 22, 2026

Environmental Protection

सांकेतिक AI इमेज

देश में पर्यावरण संरक्षण (Environmental Conservation in the Country) को नई गति देने के उद्देश्य से 2025 में लागू किए गए ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (Green Credit Programme) ने जमीनी स्तर पर असर दिखाना शुरू कर दिया है। पर्यावरण संरक्षण कानून (Environmental Protection Law) के तहत शुरू की गई इस पहल के अंतर्गत अब तक 12 राज्यों में पारिस्थितिकी बहाली के कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न राज्यों में बहाली किए गए क्षेत्र (हेक्टेयर में) के आधार पर गुजरात शीर्ष पर उभरकर सामने आया है।

गुजरात ने बनाया कीर्तिमान

गुजरात में अब तक 975 हेक्टेयर क्षेत्र में पर्यावरण बहाली का कार्य किया जा चुका है, जो अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है। यह प्रदर्शन न केवल राज्य की सक्रिय पर्यावरण नीति को दर्शाता है, बल्कि औद्योगिक विकास (Industrial development) और हरित संतुलन (Green Balance) के बीच बेहतर तालमेल का संकेत भी देता है। दूसरे स्थान पर मध्य प्रदेश है, जहां 670 हेक्टेयर क्षेत्र में पर्यावरण बहाली का कार्य पूरा हुआ है।

छत्तीसगढ़, बिहार और असम की सक्रियता

प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर छत्तीसगढ़ भी पर्यावरण बहाली की सूची में 561 हेक्टेयर के साथ अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। वहीं, बिहार में 461 हेक्टेयर भूमि पर पर्यावरण बहाली का काम पूरा किया जा चुका है। पूर्वोत्तर भारत (Northeast India) के प्रहरी माने जाने वाले असम में भी 454 हेक्टेयर पर पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को सुधारने की प्रक्रिया चल रही है।

क्या है ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम?

ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था है जहां कंपनियों, स्थानीय निकायों और व्यक्तियों को उनके पर्यावरण के अनुकूल कार्यों के लिए 'क्रेडिट' दिया जाता है। इसे एक व्यापारिक मॉडल के रूप में विकसित किया गया है, ताकि निजी और सार्वजनिक भागीदारी के माध्यम से पारिस्थितिकी को फिर से बहाल किया जा सके।

सूरत समेत दक्षिण गुजरात की अहम भूमिका

गुजरात का प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है बड़े पैमाने पर औद्योगिक गतिविधियां संचालित होने के बावजूद राज्य ने पर्यावरण बहाली में अग्रणी स्थान हासिल किया है। खासतौर पर सूरत और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में हरित परियोजनाओं को प्राथमिकता (Priority to Green Projects) देने के प्रयासों का असर इन आंकड़ों में दिखाई देता है।

बढ़ सकते हैं रोजगार के नए अवसर

सूरत के पर्यावरणविद डॉ. कपिला मनोज के मुताबिक, यदि इसी गति से ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम का विस्तार किया गया तो आने वाले वर्षों में यह भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं (Climate Commitments) को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है। साथ ही, यह कार्यक्रम स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है।