
पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक हाफिज मोहम्मद सईद। (फाइल फोटो:पत्रिका)
Targeted killings in Kashmir: जम्मू-कश्मीर में दस दिनों के भीतर दो आतंकी हमले हुए हैं। अधिकारियों को पता चला है कि दोनों हमले (पहला अनंतनाग में और दूसरा कुलगाम में) लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने किए हैं। सुरक्षा एजेंसियों को जांच में यह भी पता चला है कि लश्कर ए तैयबा (सरगना हाफिज सईद) अपनी पुरानी रणनीति पर लौट आया है। एजेंसियों ने पाया है कि लश्कर आम नागरिकों को निशाना बनाने के लिए प्रॉक्सी का इस्तेमाल करने की अपनी पुरानी कश्मीर रणनीति को फिर से अपना रहा है।
लश्कर के आतंकियों ने घाटी में पूरा खेल बदल दिया है। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, अब वे अवतोमैट कलाश्निकोवा 47 (AK47) की जगह पिस्तौल लेकर घूम रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि पिस्तौल छिपाना आसान है और इस पर किसी का ध्यान नहीं जाता।
एजेंसियों का कहना है कि लश्कर ने इन दोनों हमलों के लिए अपने प्रॉक्सी गुट 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' का सहारा लिया है, ताकि असली संगठन का नाम सामने न आए और उस पर दबाव कम रहे। अनंतनाग हमले के बाद तो सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी वायरल हुआ था, जिसमें किसी 'यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल' का नाम लिया गया, लेकिन जांच में यह सिर्फ ध्यान भटकाने की चाल निकली।
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े लोगों ने कहा कि घाटी में पिछले कुछ दिनों जितने भी हमले हुए हैं, उसमें एक नाम 'लतीफ' सामने आया है। अधिकारियों ने कहा कि यह वही शख्स है, जो लश्कर का कमांडर जाकिर गनई के साथ अनंतनाग, शोपियां और कुलगाम में पहले भी हमले करा चुका है। सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि गनई को बीते दिनों सुरक्षा बलों ने एक ऑपरेशन में मार गिराया, लेकिन उस दौरान लतीफ बचकर निकलने में कामयाब रहा।
एक अधिकारी ने कहा कि घटनाओं को अंजाम देने के बाद लतीफ खुद को लो प्रोफाइल रखता है, ताकि वह सेना व अन्य एजेंसियों के निशाने पर न आए। साथ ही दक्षिण कश्मीर में छोटे छोटे हिट एंड रन हमलों की योजना भी बना रहा है।
कुलगाम हमले से पहले आतंकी चैनलों पर एक हिट लिस्ट घूम रही थी, जिसमें कश्मीरी पंडित, अल्पसंख्यक और घाटी में काम करने वाले बाहरी मजदूरों के नाम थे। यही वजह है कि हाल के हमलों में प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाया गया। अधिकारी बताते हैं कि यह लश्कर का पुराना तरीका है, बाहरी लोगों में डर बैठाओ ताकि वे कश्मीर छोड़कर भाग जाएं। एजेंसियों को यह भी पता चला है कि हमले उन इलाकों में हो रहे हैं जहां सुरक्षा ढीली है, यानी सीधा निशाना आम नागरिक ही बन रहे हैं।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि लश्कर अब उन लोगों को भर्ती कर रहा है, जिनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे लोगों से सिर्फ एक बार हमला कराया जाता है और फिर उन्हें गायब कर दिया जाता है। इससे जांच एजेंसियों के लिए असली गुनहगार तक पहुंचना बहुत मुश्किल हो जाता है।
अनंतनाग हमले में हेड कॉन्स्टेबल हुसैन की जान चली गई थी। वे बडगाम के रहने वाले थे और अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात थे। लश्कर लंबे समय से स्थानीय कश्मीरी युवाओं को धमकी देता रहा है कि वे पुलिस या सेना छोड़ दें, वरना निशाना बनेंगे। अधिकारियों की मानें तो लश्कर चाहता है कि घाटी में ऐसे छोटे लेकिन असरदार हमले लगातार होते रहें, ताकि उसकी मौजूदगी बनी रहे और नए लोग उससे जुड़ें।
Updated on:
01 Aug 2026 06:36 pm
Published on:
01 Aug 2026 05:58 pm
