
दिल्ली हाई कोर्ट - ANI फाइल फोटो
Judge Shortage India: देशभर की अदालतों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे न्याय पाने की प्रक्रिया बेहद धीमी हो गई है। कई लोगों को अपने मामलों के फैसले के लिए वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस स्थिति की सबसे बड़ी वजह न्यायाधीशों के हजारों खाली पद माने जा रहे हैं। दरअसल, देश के हाईकोर्टों में जजों की भारी कमी बनी हुई है। 1 जुलाई 2026 तक देश के 25 हाईकोर्टों में स्वीकृत 1,122 जजों के पदों में से केवल 781 पर ही नियुक्ति हुई है, जबकि 341 पद खाली हैं। यानी देश के हाईकोर्टों में 30 प्रतिशत से अधिक जजों के पद रिक्त हैं। देश के सबसे बड़े इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। यहां 160 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 108 जज कार्यरत हैं और 52 पद खाली हैं। अगर रिक्त पदों की संख्या के बजाय प्रतिशत के आधार पर देखा जाए तो जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट सबसे अधिक प्रभावित है। यहां 25 स्वीकृत पदों में से 13 खाली हैं, यानी 52 प्रतिशत पद रिक्त हैं। (स्त्रोत: केंद्रीय कानून मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में पेश आंकड़े)
| हाईकोर्ट | स्वीकृत पद | कार्यरत जज | रिक्त पद |
|---|---|---|---|
| इलाहाबाद | 160 | 108 | 52 |
| कलकत्ता | 72 | 41 | 31 |
| पंजाब एवं हरियाणा | 85 | 55 | 30 |
| मद्रास | 75 | 51 | 24 |
| बॉम्बे | 94 | 75 | 19 |
| गुजरात | 52 | 34 | 18 |
| दिल्ली | 60 | 44 | 16 |
| मध्य प्रदेश | 53 | 37 | 16 |
| ओडिशा | 33 | 18 | 15 |
| तेलंगाना | 42 | 27 | 15 |
| कर्नाटक | 62 | 48 | 14 |
न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सिर्फ नए कोर्ट भवन तैयार करना या सुविधाओं का विस्तार करना पर्याप्त नहीं है। अदालतों में पर्याप्त संख्या में न्यायाधीशों की उपलब्धता भी उतनी ही जरूरी है। जब तक खाली पड़े पदों पर नियुक्तियां नहीं होंगी, तब तक लंबित मामलों का बोझ कम होना मुश्किल रहेगा और लोगों को फैसले के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ेगा।
ऐसे में समय की मांग है कि न्यायाधीशों के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए। इससे न केवल मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी, बल्कि आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा भी और मजबूत होगा।
Updated on:
30 Jul 2026 07:18 am
Published on:
30 Jul 2026 07:18 am
