
Anti Paper Leak Bill 2026 : लोकसभा में राहुल गांधी के बयान पर हंगामा, एंटी पेपर लीक संशोधन बिल सर्वसम्मति से पारित (फोटो सोर्स: ANI)
Rahul Gandhi Parliament Speech: लोकसभा में विपक्ष की नारेबाजी और शोर-शराबे, हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक संशोधन बिल सर्वसम्मिति से पारित कर दिया गया। इससे पहले विपक्ष के नेता राहुल गांधी के दो बयानों को लेकर लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ। दरअसल, बिल पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक छात्रा से हुई बातचीत का उल्लेख करते हुए किसी का नाम लिए बगैर ‘इडियट’ और उसको फॉलो करने वालों को अंधभक्त कहा तो भाजपा सांसदों ने विरोध जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू ने इडियट शब्द को असंसदीय बताते हुए इसे कार्यवाही से हटाने की मांग की। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने असंसदीय शब्दों को हटाने के साथ राहुल को मर्यादित आचरण की हिदायत दी। इसके बाद राहुल ने छात्र आंदोलन पर पुलिस अत्याचार और फायरिंग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि गृह मंत्री शाह डर गए हैं और सवालों से बचने के लिए संसद नहीं आ रहे हैं। शाह पर जैसे ही राहुल ने पुलिस फायरिंग के आदेश का आरोप लगाया, वैसे ही भाजपा सांसदों ने खड़े होकर विरोध शुरू कर दिया।
भाजपा सांसदों ने राहुल के गृह मंत्री अमित शाह पर फायरिंग का आदेश देने के आरोप का विरोध करते हुए इसको प्रमाणित करने की चुनौती दी। कार्मिक राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि छात्रों के प्रदर्शन में गोली चली ही नहीं है। सिर्फ टियर गैस छोड़ी गई। वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल से कहा कि गृह मंत्री के फायरिंग वाले ऑर्डर की कॉपी सदन में रखिए।
रिजिजू ने साफ कह दिया कि राहुल के माफी मांगे बिना ऐसे सदन नहीं चल सकेगा। इसके चलते काफी देर तक हंगामा होता रहा। अध्यक्ष बिरला ने राहुल को अपनी बात पूरी करने के लिए कहा, लेकिन हंगामे के चलते उनका भाषण अधूरा रह गया। दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। दोपहर 3 बजे कार्यवाही फिर से शुरू होने पर बिल पर केन्द्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बार-बार स्पष्ट किया गया है कि कोई गोली नहीं चली। जब गोली चली ही नहीं, तो गोली चलाने के आदेश का सवाल ही नहीं उठता। इस तरह का आदेश देने का अधिकार मंत्री के पास नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट के पास होता है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष के नेता की भाषा असंसदीय के साथ अनुचित थी। यदि कोई खुद को शिक्षित और संसदीय परंपराओं से परिचित मानता है, तो उसे पता होना चाहिए कि सदन के भीतर ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता द्वारा देश के युवाओं को मूर्ख कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई को विपक्ष के नेता शायद किसी विशेष सोच के कारण प्रधानमंत्री के आवास 7 एलकेएम के बाहर जाकर बैठ गए। ऐसा लगा मानो उनकी गहरी इच्छा थी कि देश उन्हें चुने और 7 एलकेएम में बैठाए। जब यह इच्छा पूरी नहीं हुई तो वे निराश और हताश होकर वहां के गेट पर जाकर बैठ गए।
सत्ता पक्ष की नारेबाजी के बीच सपा सांसद अखिलेश यादव ने राहुल का बचाव किया। उन्होंने कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है तो ये सरकार की जिम्मेदारी है कि वो बताए किसके आदेश पर बच्चों पर अत्याचार किया। इस पर रिजिजू ने कहा कि अगर जांच की मांग करें तो मानते हैं, लेकिन राहुल ने नाम लेकर आरोप लगाया है।
राहुल गांधी ने पेपर तैयार करने से पहुंचाने और चेकिंग तक की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और कहा कि ये एग्जाम सिस्टम नहीं, एक्सटॉर्शन सिस्टम है। ईमानदार छात्र इस दौड़ में पीछे हो रहा है। 30 से 40 लाख में पेपर लीक हो रहा है। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियां शिक्षा व्यवस्था में शामिल है। निजी कंपनियां परीक्षा करा रही हैं। धर्मेंद्र प्रधान नहीं, आरएसएस शिक्षा मंत्रालय चला रहा था।
राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा में तीखी बहस हुई। सीपीआइ नेता आएशी घोष को ऑफिस से दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने के मुद्दे पर मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि एक राष्ट्रीय पार्टी के ऑफिस में दिल्ली पुलिस के लोग किसी को उठाने जाते हैं तो लोग सुरक्षित नहीं हैं। अब देश में लोकतंत्र खतरे में है। इस पर सदन के नेता और कैबिनेट मंत्री जे पी नड्डा ने कहा कि यह एक सामान्य लॉ एंड आर्डर सिचुएशन है। मैं स्वयं स्टूडेंट एक्टिविस्ट रहा हूं। कई बार गिरफ्तार हुआ हूं। आपातकाल के दौरान क्लासरूम से दो गिरफ्तार हुआ हूं। किसी भी स्टूडेंट एक्टिविस्ट को कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
नई दिल्ली. मानसून सत्र के आठवें दिन हंगामे के बीच राज्यसभा में वंदेमातरम के अपमान पर सजा के प्रावधान वाले राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित हो गया। विपक्ष ने बुधवार को सुबह से ही गृहमंत्री अमित शाह को सदन में बुलाने की मांग करते हुए हंगामा किया जिसके चलते सदन की कार्रवाई दो बार स्थगित करनी पड़ी। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बिल पर बहस का जवाब दिया।
सांसद और भारतीय जनता पार्टी के महामंत्री डॉ. राधामोहन दास ने हंगामे के बीच सत्ता पक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत की और कहा, देश की संविधान सभा में जाने कितने विषयों पर चर्चा हुई लेकिन एक बार भी वंदेमातरम् पर चर्च नहीं हुई। 1923 में कांग्रेस के अधिवेशन में कहा गया कि कांग्रेस के अधिवेशन में वंदेमातरम् नहीं गाया जाएगा। तब किसी ने उसका विरोध नहीं किया।
वाइएसआरसीपी के गोलाबाबूराव ने बिल के समर्थन में बोलते हुए कहा कि बंकिम चंद्र चटर्जी के इस गीत के कारण स्वतंत्रता संग्राम ने जोर पकड़ा और हमें आजादी मिली। आरजेडी के मनोज कुमार झा ने कहा कि राष्ट्रगान और वंदेमातरम को आमने सामने खड़ा किया जा रहा है। यह उचित नहीं है। आप के संजय सिंह ने राष्ट्रगान और तिरंगे का मुद्दा उठाया। हालांकि उन्होंने विपक्ष के साथ वाकआउट नहीं किया और बाद में बिल का समर्थन भी किया। बीआरएस और बीजू जनता दल ने भी बिल का समर्थन किया।
Updated on:
30 Jul 2026 06:55 am
Published on:
30 Jul 2026 06:55 am
