
Punjab and Haryana High Court
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने पति द्वारा पत्नी को गुज़ारा भत्ता देने का के एक फैमिली कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। दरअसल लुधियाना फैमिली कोर्ट ने 25 अगस्त 2025 को एक पति को हर महीने अपनी पत्नी को 5,000 रुपए गुज़ारा भत्ता देने का आदेश दिया था। पति इस फैसले से खुश नहीं था क्योंकि उसकी पत्नी ने उसे ज़िंदा जलाकर मारने की कोशिश की थी। ऐसे में उसने इस फैसले को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी।
रिपोर्ट के अनुसार जिस शख्स पर अपनी पत्नी को गुज़ारा भत्ता देने का फैसला थोपा गया, उसके वकील ने बताया कि 2019 में शादी के बाद से ही पति-पत्नी के बीच अनबन चल रही थी। वकील ने बताया कि पिछले साल 13-14 मई की रात जब पति सोने जा रहा था, तब पत्नी ने उस पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर उसे ज़िंदा जलाकर मारने की कोशिश की। पति ज़िंदा तो बच गया, लेकिन इस घटना में उसके शरीर का करीब 45% हिस्सा जल गया। उसे काफी गंभीर चोट आई जिसकी वजह से उसका 4 महीने से ज़्यादा समय तक इलाज चला। पति ने इस घटना की शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पत्नी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज हुआ, जो अभी भी चल रहा है। ऐसे में दोनों अब अलग-अलग रह रहे हैं।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पति की दलीलों को ध्यान में रखते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश पर स्टे लगा दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि जब पत्नी पर पति की जान लेने का गंभीर आरोप है और पति को जीवन-मरण की स्थिति का सामना करना पड़ा, तो ऐसे में पत्नी को गुज़ारा भत्ता देना गलत है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण का उद्देश्य पत्नी को आर्थिक संकट से बचाना है, लेकिन यह किसी भी स्थिति में पति पर अन्याय नहीं होना चाहिए।
Updated on:
24 Apr 2026 01:58 pm
Published on:
24 Apr 2026 01:53 pm
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