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Padma Shri 2026: ‘माँ का दूध ही बच्चे का पहला टीका है!’ पद्म श्री मिलते ही भावुक हुईं डॉक्टर साहब, सुनाई 35 साल पुरानी संघर्ष की कहानी

Padma Shri 2026: 83 वर्षीय डॉ. फर्नांडिस ने एशिया का पहला ह्यूमन मिल्क बैंक स्थापित कर नवजात शिशुओं की जान बचाने में क्रांतिकारी योगदान दिया।

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Dr Armida Fernandez Padma Shri

डॉ आर्मिडा फर्नांडीज पद्म श्री

Dr Armida Fernandez Padma Shri: मुंबई की वरिष्ठ नेनेटोलॉजिस्ट डॉ. आर्मिडा फर्नांडिस को गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। 83 वर्षीय डॉ. फर्नांडिस ने एशिया का पहला ह्यूमन मिल्क बैंक स्थापित कर नवजात शिशुओं की जान बचाने में क्रांतिकारी योगदान दिया। पुरस्कार की घोषणा होते ही वे भावुक हो गईं और कहा, 'यह कभी एक व्यक्ति का काम नहीं होता। नवजात मृत्यु दर कम करना पूरी टीम का सामूहिक प्रयास था। मेरे पीछे एक अद्भुत विभाग था, और हर सफलता पूरी टीम की है।'

एशिया का पहला ह्यूमन मिल्क बैंक: 1989 की शुरुआत

1972-73 में सायन अस्पताल, मुंबई में नेनेटोलॉजी की शुरुआत करते समय नवजात मृत्यु दर बहुत ऊंची थी। सेप्सिस और दस्त जैसी बीमारियां फॉर्मूला मिल्क और बोतलों से जुड़ी पाई गईं। डॉ. फर्नांडिस ने शोध के बाद फैसला किया कि हर बच्चे को मां का दूध मिलना चाहिए, खासकर कमजोर नवजातों को। उन्होंने स्वस्थ स्तनपान कराने वाली माताओं से अतिरिक्त दूध व्यक्त करवाकर उन बच्चों को दिया जिनकी माताएं दूध नहीं दे पाती थीं या बीमार थीं। इससे कोलोस्ट्रम (पहला दूध) मिला, जो एंटीबॉडी से भरपूर 'प्राकृतिक टीका' है। 1989 में सायन अस्पताल में एशिया का पहला ह्यूमन मिल्क बैंक स्थापित हुआ। ताज ग्रुप और अन्य सहयोगियों से अपग्रेड के बाद अस्पताल में फॉर्मूला मिल्क का इस्तेमाल पूरी तरह बंद हो गया। यह मॉडल केईएम, जेजे अस्पतालों और देशभर में फैला, आज भारत में 100 से अधिक मिल्क बैंक हैं।

‘माँ का दूध बच्चे का पहला इम्यूनाइजेशन है’

डॉ. फर्नांडिस ने कहा, "मां का दूध बच्चे के जीवन के पहले चार हफ्तों में सबसे महत्वपूर्ण है। कोलोस्ट्रम इम्यूनिटी बढ़ाता है, संक्रमण रोकता है, पाचन तंत्र मजबूत करता है और वजन बढ़ाने में मदद करता है।" उन्होंने ब्रेस्टफीडिंग मैनुअल (ब्लू मॉड्यूल) तैयार किया, यूनिसेफ के साथ वीडियो बनाए और हजारों डॉक्टरों-नर्सों को प्रशिक्षित किया।

दशकों का संघर्ष और SNEHA की स्थापना

1970 के दशक से शुरू हुआ यह सफर 50 साल से अधिक का है। अस्पताल के बाहर भी काम करने की जरूरत समझकर 1999 में उन्होंने SNEHA (Society for Nutrition, Education and Health Action) की स्थापना की। धारावी जैसे झुग्गी-झोपड़ी इलाकों में मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अब पेलिएटिव केयर (टर्मिनल बीमारियों की देखभाल) तक पहुंचाया। 13 साल पहले बेटी को कैंसर से खोने के बाद उन्होंने अंतिम दिनों की देखभाल पर फोकस किया। SNEHA आज 500+ लोगों की टीम के साथ मुफ्त सेवाएं देती है।

राष्ट्रीय प्रभाव और आंकड़े

SRS 2021 रिपोर्ट (मई 2025 में जारी) के अनुसार, मातृ मृत्यु दर 130 से 93, शिशु मृत्यु दर 39 से 27 और नवजात मृत्यु दर 26 से 19 प्रति हजार हो गई। डॉ. फर्नांडिस का योगदान इसमें महत्वपूर्ण है। वे कहती हैं, "अस्पताल पर्याप्त नहीं, समाज में जाकर काम करना जरूरी था।" पद्म श्री उन्हें सम्मान मिला, लेकिन वे इसे टीम की जीत मानती हैं। यह कहानी प्रेरणा है कि एक डॉक्टर कैसे सामाजिक बदलाव ला सकती है।

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