
ईरान से कच्चे तेल की आपूर्ति के बाद भारत में तेल की कमी नहीं रहेगी। (फोटो: ANI)
India to Import Oil from Iran : अमेरिका और ईरान में जंग खत्म होने के समझौते के बाद भारतीय नागरिकों के लिए यह खुशखबरी है कि भारत को ईरान से तेल मिलने लगा है और अब पेट्रोल पंपों पर कतारें कम हो जाएंगी। मीडिया रिपोटर्स के अनुसार अमेरिका की ओर से दी गई 60 दिन के प्रतिबंधों में छूट भारत के लिए एक अवसर दे रही हैं, जो कभी ईरानी कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार था, लेकिन तेल शोधक कंपनियों को चीन सहित कई बिंदुओं पर विचार करना होगा। अमेरिका की ओर से ईरान को प्रतिबंधों में ढील से भारत को एक अवसर मिला है, जो कभी ईरानी कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार था। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी ने भारतीय रिफाइनरों सहित अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों और व्यापारिक घरानों से संपर्क करना शुरू कर दिया है ताकि वाणिज्यिक और व्यापारिक संबंधों को फिर से शुरू करने के लिए बैठकें और फोन कॉल किए जा सकें।
अमेरिकी वित्त विभाग ने सोमवार को ईरान को तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और पेट्रोकेमिकल के उत्पादन, वितरण और बिक्री की अनुमति देते हुए 21 अगस्त तक छूट जारी की थी। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने का भी वादा किया है। तेहरान इन दोनों उपायों पर भरोसा कर रहा है ताकि वह अपने तेल को, जिसका निर्यात वर्षों से मुख्य रूप से चीन को होता रहा है, व्यापक अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचा सके।
मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट एनालिसिस के अनुसार युद्ध से पहले, 2018 में भारत ईरान से लगभग 5,18,000 बैरल प्रति दिन कच्चा तेल आयात करता था, जो उसके कुल कच्चे तेल के आयात का 11% से ज़्यादा था। अमेरिका द्वारा कड़े प्रतिबंध फिर से लागू करने और छूट खत्म करने के बाद, 2019 में यह खरीद घट कर शून्य हो गई। जंग के दौरान भारत को तेल के लिए बहुत दिक्कत हुई।
अमेरिका की ओर से अप्रेल 2026 में अस्थायी तौर पर प्रतिबंधों में छूट मिलने के बाद भारत को ईरान से लगभग 40 लाख बैरल कच्चा तेल मिला। तेल की उपलब्धता के कारण ऐसी उम्मीद की जा रही है किभारत में पेट्रोल पंपों पर कतारें कम होंगी। हालांकि, युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुलने के बाद, भारतीय रिफाइनर मध्य पूर्व और रूस के पुराने सप्लायर्स के पास वापस जा रहे हैं और ईरान के साथ खरीद का कोई नया पक्का समझौता नहीं हुआ है। हालांकि ईरानी अधिकारी अभी अपने बड़े ऑफशोर फ्लोटिंग रिज़र्व से बिक्री के लिए बातचीत करने की कोशिश कर रहे हैं।
बैंकिंग, शिपिंग और इंश्योरेंस पर लगी पाबंदियों की वजह से भारत का ईरान के साथ लेन-देन मुश्किल हो गया है। इस कारण सप्लाई के दूसरे विकल्पों की ओर झुकाव हो गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने के दौरान, भारत अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाया है। भारतीय रिफाइनरों ने गल्फ और रूस जैसे देशों से आयात बढ़ाया, जो अभी भी भारत के मौजूदा आयात पोर्टफोलियो का मुख्य आधार बने हुए हैं।
बहरहाल, भारत की सरकारी तेल कंपनियां यह देख रही हैं कि क्या स्पॉट टेंडर से ईरानी कच्चे तेल को अपने नियमित मिक्स में फिर से शामिल किया जाए, हालांकि अभी तक बड़े पैमाने पर कोई औपचारिक समझौता पक्का नहीं हुआ है।
भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और तेल मार्केटिंग कंपनियों के अनुसार, अमेरिका और ईरान जंग खत्म होने के बाद भारत के पास अभी कुल लगभग 60 से 74 दिनों का राष्ट्रीय तेल स्टॉक है, जिसमें कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और आपातकालीन भंडार शामिल हैं । भारत के खास भूमिगत भंडार का प्रबंधन 'इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड' करता है), जिसमें 5.33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल रखा जाता है। हालांकि, क्योंकि ये भंडार अपनी क्षमता के केवल 64% तक ही भरे होते हैं, इसलिए ये सीधे तौर पर देश की लगभग 5 से 10 दिनों की खपत पूरी कर सकते हैं।
देश के बाकी पेट्रोलियम बफर में रोजाना इस्तेमाल होने वाला स्टॉक, कच्चे तेल की पाइपलाइन और सरकारी तेल कंपनियों मसलन IOCL, BPCL और HPCL और कॉमर्शियल डिपो में रखा रिफाइंड उत्पादों का स्टॉक शामिल है। सरकार इस स्टॉक को सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों से निपटने के लिए काफी ठीक मानती है, साथ ही वह लंबे समय के लिए क्षमता बढ़ाने पर भी विचार कर रही है।
Updated on:
24 Jun 2026, 3:09 PM IST
Published on:
24 Jun 2026, 3:08 PM IST
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