
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन। (फाइल फोटो: @WhiteHouse)
US-Iran Deal Conflict Sanctions: अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता समझौता होने के बाद अब परत-दर-परत डील की कई बातें खुल कर सामने आ रही हैं। ताजा जानकारी के अनुसार जंग खत्म होने की इस फाइनल डील के तहत ईरान को प्रतिबंधों से राहत के तौर पर 50 अरब डॉलर तक मिल सकते हैं। ध्यान रहे कि डील में ईरान पर अमेरिकी तेल प्रतिबंधों को तुरंत हटाना और भविष्य में 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण फंड बनाना शामिल है।
अमेरिका और ईरान ने 17-18 जून 2026 को अपनी जंग खत्म करने के मकसद से एक समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दिया था। इस समझौते पर फ्रांस के पैलेस ऑफ वर्साय में एक डिनर के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और तेहरान में अपने कार्यालय में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हस्ताक्षर किए थे। 14 बिंदुओं वाले इस अहम समझौते में एक स्थायी समझौते के लिए रोडमैप बताया गया है और कई महत्वपूर्ण कदमों के लिए शर्तें तय की गई थीं।
दोनों देशों के बीच बातचीत के जानकार सूत्रों के मुताबिक, दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच मूल रूप से 6-6 अरब डॉलर की दो अलग-अलग किस्तें देने पर सहमति बनी थी और अंतिम हस्ताक्षर समारोह स्विट्जरलैंड में होना था। ईरान के प्रवक्ता का कहना है कि अब वह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।'
इस डील के संबंध में बताए गए फ्रेमवर्क के अनुसार ईरान को शुरुआती 12 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे। वहीं 60 दिनों की बातचीत के दौरान और 12 अरब डॉलर जारी किए जा सकते हैं। एक और अहम बात, अगर सभी पक्ष किसी समझौते पर पहुंच जाते हैं, तो प्रतिबंधों में ढील और जारी किए गए फंड की कुल वैल्यू 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
एक अहम बात यह है कि यह फंड बिना किसी रोक-टोक वाले कैश के तौर पर जारी नहीं किया जा सकता है। अमेरिकी अधिकारियों का लंबे समय से यह तर्क रहा है कि इस पैसे का इस्तेमाल 'इस्लामिक रिवोल्युशनरी गार्ड कॉर्प्स' के लिए किया जा सकता है। इसके बजाय, इस व्यवस्था में खाने-पीने की चीज़ों और दवाओं जैसी चीज़ों पर ही खर्च करने की सीमा तय की गई है।
अमेरिका की तीसरी शर्त यह है कि इन फंड्स का इस्तेमाल अमेरिका से जुड़े मंजूरशुदा बाजारों और फाइनेंशियल चैनलों के जरिये सामान खरीदने में किया जाए। अब यह बात साफ नहीं है कि ईरान इस शर्त से पूरी तरह सहमत है भी या नहीं, हालांकि तेहरान ने सार्वजनिक रूप से इसे ठुकराया भी नहीं है।
जानकारी के अनुसार 50 अरब का आंकड़ा 2015 के JCPOA के तहत अनुमानित सेंट्रल बैंक की उन एसेट्स (संपत्तियों) का जिक्र है जिन्हें अनफ्रीज़ किया गया था। अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा बातचीत और फ्रेमवर्क समझौतों में सीधे तौर पर 50 अरब के भुगतान का ज़िक्र नहीं है। इसके बजाय, वे तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट, लगभग 16 अरब के रुके हुए फंड जारी करने और प्राइवेट सेक्टर के सहयोग वाले पुनर्निर्माण पैकेज पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
एक प्रवक्ता ने बताया कि इस समझौते से ईरान को अपनी पहले से फ्रीज की गई संपत्ति मिल जाएगी, हालांकि अमेरिका का कहना है कि इस व्यवस्था के बावजूद उस पर प्रतिबंध लागू रहेंगे। बहरहाल ऐसे में यक्ष प्रश्न यह है कि इतनी लंबी जंग चलने और ईरान के न झुकने के बावजूद वह अमेरिका की ओर से लगाए गए ये प्रतिबंध अब क्यों मानेगा।
Published on:
23 Jun 2026 04:54 pm
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