
भारत-पाक का झंडा। (फोटो- AI)
अमेरिका से भारत ने पाकिस्तान को एक बार फिर कड़ा संदेश दिया है। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने साफ कहा है कि पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि के अच्छे इरादे और दोस्ती की भावना को आधा सदी से लगातार तोड़ने की कोशिश की।
एक मैगजीन में छपे लेख में उन्होंने कहा कि भारत का इस संधि को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला दरअसल पाकिस्तान के बर्ताव को सिर्फ स्वीकार करना भर है।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने जल संधि को अस्थायी तौर पर रोकने का ऐलान किया था। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों ने पहलगाम में 26 लोगों की हत्या कर दी।
इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। क्वात्रा ने लिखा कि 1960 में यह संधि अच्छी भावना और शांति के मकसद से साइन हुई थी। लेकिन पाकिस्तान ने इसे लगातार कमजोर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा- पाकिस्तान ने आधे सदी तक इस संधि की भावना को नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
पाकिस्तान ने हाल ही में एक कॉन्फ्रेंस आयोजित कर भारत के फैसले का विरोध जताया। लेकिन राजदूत क्वात्रा ने इस पर तीखा जवाब देते हुए कहा कि पाकिस्तान खुद संधि की मूल भावना को खत्म करने वाला रहा है।
उन्होंने याद दिलाया कि पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की पाकिस्तान की नीति और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले उसके रवैये ने इस संधि को खोखला बना दिया।
भारत का रुख अब साफ है - जब तक पाकिस्तान आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता और संधि का सम्मान नहीं करता, तब तक पुरानी व्यवस्था जारी नहीं रखी जा सकती। क्वात्रा ने जोर देकर कहा कि भारत का यह कदम कोई नई शुरुआत नहीं बल्कि हकीकत को स्वीकार करने का फैसला है।
सिंधु जल संधि को विश्व बैंक की मध्यस्थता में तैयार किया गया था। इसमें भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी के बंटवारे का फॉर्मूला तय किया गया था।
भारत ने लंबे समय तक इस संधि का सम्मान किया, भले ही दोनों देशों के बीच तनाव रहे। लेकिन पाकिस्तान की तरफ से बार-बार उल्लंघन, पानी रोकने की धमकियां और आतंकियों को समर्थन देने जैसे कामों ने भरोसा पूरी तरह तोड़ दिया।
राजदूत क्वात्रा ने लिखा कि पाकिस्तान की हरकतें देखते हुए भारत के पास और कोई रास्ता नहीं बचा। उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि कोई भी संधि एकतरफा नहीं चल सकती। जब एक पक्ष इसे तोड़ने पर तुला हो तो दूसरे पक्ष को भी अपने हितों की रक्षा करनी ही पड़ती है।
क्वात्रा ने साफ किया कि भारत हमेशा शांति चाहता है, लेकिन शांति के नाम पर आतंकवाद को पनाह नहीं दी जा सकती। पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शोर मचा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि उसने खुद इस संधि का भरोसा खत्म कर दिया। भारत का फैसला इसी हकीकत का आईना है।
Updated on:
02 Aug 2026 10:31 am
Published on:
02 Aug 2026 10:31 am
