
हाल ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। ब्लूमबर्ग के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने पिछले साल सितंबर 2025 में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात में साफ कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या उनके शीर्ष सहयोगियों के दबाव में भारत आने वाला नहीं है। डाेभाल ने रुबियो को यह भी अवगत करा दिया था कि मोदी सरकार ट्रंप के कार्यकाल को खत्म होने तक इंतजार करने को तैयार हैं, क्योंकि भारत अतीत में भी अमेरिकी प्रशासनों से खराब संबंधों का सामना कर चुका है।
तब डोभाल ने रुबियो से बताया था कि दिल्ली चाहती है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध तभी सुधर सकते हैं, जब ट्रंप और उनके सहयोगी सार्वजनिक रूप से भारत की आलोचना कम करें। रिपोर्ट के अनुसार डोभाल व रुबियो की यह मुलाकात तब हुई जब दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव चरम पर था। अगस्त 2025 में ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा दिया था, जिसमें रूसी तेल खरीद पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत पैनल्टी शुल्क भी शामिल था। लेकिन भारत ने रूस से तेल आयात जारी रखा था, जिससे अमेरिका नाराज था।
डोभाल और रूबियों की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम होने लगा। सितंबर 2025 में ट्रंप ने मोदी को जन्मदिन पर फोन किया और उनकी तारीफ की। साल के अंत तक दोनों नेताओं ने कई बार बात की, जिससे बातचीत आगे बढ़ी। जनवरी में भारत आए ट्रंप के भरोसेमंद नए अमरीकी राजदूत सर्जियो गोर ने अमेरिका-भारत के संबंध सुधारने के प्रयास और आगे बढ़ाए।
यही वजह रही कि 2 फरवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बातचीत की और व्यापार समझौता हो गया। भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया। रूसी तेल खरीद पर 25 प्रतिशत पैनल्टी का शुल्क भी हटा लिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की धैर्यपूर्ण और मजबूत रणनीति ने ट्रंप की दबाव नीति को तोड़ा। यह भारत-अमरीका संबंधों में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगा। भारत ने स्पष्ट किया कि वह राष्ट्रीय हितों पर समझौता कभी नहीं करेगा।
Updated on:
05 Feb 2026 06:38 am
Published on:
05 Feb 2026 06:38 am
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