
सदन में दो तिहाई बहुमत हासिल करना चाहती है NDA (Photo-IANS)
Rajya Sabha NDA Two-Third Majority: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए (NDA) केंद्र में मजबूत स्थिति में है, लेकिन अब तक उसके पास संविधान में अपनी इच्छा के मुताबिक बदलाव करने लायक दो-तिहाई बहुमत नहीं था। हालांकि, हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों ने इस समीकरण को बदलने की संभावनाओं को तेज कर दिया है। विपक्षी पार्टियों के सांसद टूटकर एनडीए को समर्थन दे रहे हैं।
तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने बागी होकर एनसीपीआई में विलय कर लिया और सदन में एनडीए का समर्थन देने की बात कही है। वहीं अब उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों के टूटने की भी अटकलें लगाई जा रही है। बताया जा रहा है कि ये सांसद एकनाथ शिंदे की पार्टी में विलय करेंगे। इस तरह लोकसभा में लगातार एनडीए की ताकत बढ़ रही है।
बता दें कि सदन में सामान्य विधेयक साधारण बहुमत से पारित हो जाते हैं, लेकिन संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में कुल सदस्य संख्या के बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होती है। विवादास्पद संशोधनों के लिए सरकार आमतौर पर आरामदायक दो-तिहाई बहुमत चाहती है।
लोकसभा के मुकाबले राज्य सभा में एनडीए का रास्ता ज्यादा आसान नजर आ रहा है। मौजूदा समय में राज्य सभा में एनडीए के पास 148 सदस्य हैं और चल रहे चुनावों के बाद यह संख्या बढ़कर 151 तक पहुंचने की उम्मीद है।
रिपोर्टों के मुताबिक, टीएमसी के तीन सांसदों के इस्तीफे के बाद होने वाले उपचुनाव में एनडीए इन तीनों सीटों पर जीत हासिल कर सकता है। ऐसा होने पर गठबंधन की ताकत बढ़कर 154 हो जाएगी, जो 245 सदस्यीय सदन में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े 163 से सिर्फ नौ सीटें कम होगी।
वहीं अटकलें लगाई जा रही है कि आने वाले समय में टीएमसी के और भी राज्य सभा सांसद इस्तीफा दे सकते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उपचुनाव में बीजेपी जीतती है तो एनडीए की ताकत और बढ़ जाएगी।
समाजवादी पार्टी में संभावित टूट की चर्चाओं ने भी राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। यदि विपक्षी दलों के कुछ सांसद एनडीए के साथ आते हैं या मतदान से दूर रहते हैं, तो इससे राज्य सभा में सत्तापक्ष की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
बीजेपी की संसदीय रणनीति अब केवल चुनावी जीत पर निर्भर नहीं दिख रही है। पार्टी राज्य सभा में सीटों की बढ़ोतरी, विपक्षी दलों में टूट, रणनीतिक समर्थन और क्षेत्रीय दलों के सहयोग के जरिए धीरे-धीरे अपने आंकड़े मजबूत करने में जुटी है।
Published on:
18 Jun 2026 01:55 pm
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