
अखिलेश यादव (बाएं) और अमित शाह ( IANS File Photo)
Samajwadi Party Split: देश की राजनीति में विपक्षी पार्टियों के सांसद लगातार टूट रहे है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने NCPI में विलय कर लिया है और सदन में एनडीए का समर्थन देने की बात कही है। इससे पहले आम आदमी पार्टी के सांसद भाजपा में गए। इसी बीच बुधवार को कहा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे के छह सांसदों ने लोक सभा स्पीकर को चिट्ठी लिख कर शिंदे गुट में मिलने की बात बताई है। अब अखिलेश यादव की पार्टी सपा के सांसद को लेकर यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर का बयान सामने आया है।
यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होगी। राम गोपाल यादव ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी को चिट्ठी सौंपी है। खनन घोटाला और गोमती रिवर फ्रंट घोटाला का मास्टरमाइंड कौन है, पूरा उत्तर प्रदेश जानता है। शिकंजा कस रहा है तो सपा परेशान है। महाराष्ट्र बंगाल छोड़िए, समूची सपा, भाजपा में शामिल होने को तैयार बैठी है।
कैबिनेट मंत्री राजभर के दावे के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। क्योंकि यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने है। ऐसे में पार्टी में टूट अखिलेश यादव के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
लोकसभा में समाजवादी पार्टी के 37 सांसद है। ओमप्रकाश राजभर के सपा में टूट के बयान के बाद अब अटकलें लगाई जाने लगी है कि अगला नंबर सपा का हो सकता है।
बता दें कि वर्तमान में लोकसभा में एनडीए के सांसदों की संख्या 293 है। इसमें से सबसे ज्यादा बीजेपी के 240 सांसद है। सदन में एनडीए के पास दो तिहाई बहुमत नहीं है। दो-तिहाई बहुमत से 69 सीटें कम है। टीएमसी के 20 सांसदों के समर्थन देने के बाद एनडीए के 313 सांसद हो गए है। हालांकि अभी भी 49 सांसदों की जरूरत है। शिव सेना (उद्धव) के छह सांसद भी औपचारिक रूप से शिंदे गुट में चले गए तो यह संख्या 43 रह जाएगी।
इसी बीच उद्धव ठाकरे के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही है। दरअसल, लोकसभा में शिवसेना यूबीटी के 9 सांसद है। अगर ऐसे में अगर 6 सांसद एक साथ दूसरी पार्टी में विलय करते हैं तो उनकी सांसदी नहीं जाएगी। एकनाथ शिंदे की पार्टी एनडीए का हिस्सा है।
वहीं तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़ दिया। कांग्रेस ने सरकार बनाने में एक्टर विजय की पार्टी टीवीके का सहयोग किया। इसके बाद डीएमके और कांग्रेस के बीच दूरी बन गई। वहीं डीएमके इंडिया गठबंधन से भी अलग हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीजेपी के नेता डीएमके से भी बात कर रहे है। बताया जा रहा है कि इसके लिए एमके स्टालिन से बात की जा रही है। लोकसभा में डीएमके के 22 सांसद है।
दरअसल, लोकसभा चुनाव 2029 से पहले परिसीमन बिल को पास कराने का बीजेपी का एजेंडा है। यह बिल पहले भी सदन में आ चुका है, लेकिन दो तिहाई बहुमत नहीं होने के कारण बिल को रद्द कर दिया गया। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा किसी भी तरह सदन में दो तिहाई बहुमत हासिल करना चाहती है, ताकि परिसीमन बिल पारित करवाया जा सके।
Updated on:
17 Jun 2026 02:33 pm
Published on:
17 Jun 2026 02:14 pm
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