
डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी। (फोटो- ANI X)
Middle East Tensions: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है। पहली बार इस संकट के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की।
इस बातचीत की जानकारी खुद अमेरिकी राजदूत ने साझा की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इस बातचीत के पीछे क्या रणनीति है और दुनिया पर इसका क्या असर पड़ेगा?
पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद यह दोनों नेताओं की पहली फोन पर बातचीत थी। उन्होंने मिडिल ईस्ट के हालात पर चर्चा की, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित और चालू रखने पर जोर दिया। यह रास्ता दुनिया भर में तेल सप्लाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और हाल के तनाव की वजह से यहां स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की। इस बातचीत में मिडिल ईस्ट की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने की जरूरत पर खास चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस बातचीत की जानकारी दी। उन्होंने X पर लिखा कि उनकी राष्ट्रपति ट्रंप से वेस्ट एशिया की स्थिति पर अच्छी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि जल्द से जल्द तनाव कम हो और शांति कायम हो। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला और सुरक्षित रहना पूरी दुनिया के लिए बहुत जरूरी है। दोनों नेता इस बात पर भी सहमत हुए कि शांति और स्थिरता के प्रयासों को लेकर वे लगातार संपर्क में बने रहेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में इस स्थिति को चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि भारत सभी देशों- ईरान, इजरायल, अमेरिका और खाड़ी देशों से लगातार बात कर रहा है। उनका जोर है कि तनाव कम हो और बातचीत के जरिए समाधान निकले।
वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चल रही है और यह सकारात्मक है। इसी वजह से उन्होंने अपने अधिकारियों को अगले पांच दिनों तक ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमला न करने को कहा। लेकिन ईरान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही है। इससे पहले ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया था।
बता दें पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच करीब 25 दिनों से तनाव और संघर्ष जारी है। होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों और रुकावट की वजह से दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत अपनी जरूरत का 60% से ज्यादा तेल-गैस इसी इलाके से लाता है, इसलिए यह संकट भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर डाल रहा है।
Updated on:
24 Mar 2026 08:44 pm
Published on:
24 Mar 2026 06:36 pm
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