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देश की सीमाओं पर रहेगी पैनी नजर, ISRO लॉन्च करने जा रहा NVS-03 उपग्रह

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अगले माह में NVS-03 उपग्रह लॉन्च करेगा। यह उपग्रह लॉन्च होने के बाद भारत का स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम नाविक (NAVIC) फिर से ऑपरेशनल हो जाएगा। यह देश की सीमाओं पर नजर रखने और सुरक्षा की दृष्टि से काफी अहम है।

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भारत

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Vinay Shakya

Apr 13, 2026

ISRO

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली नाविक (NaviC) को फिर से सक्रिय करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। मार्च 2026 में IRNSS-1F उपग्रह के अंतिम एटॉमिक क्लॉक के फेल होने के बाद प्रणाली ठप पड़ गई थी। अब अगले महीने नई पीढ़ी के तीसरे उपग्रह NVS-03 का प्रक्षेपण किया जाएगा, जिससे नाविक प्रणाली दोबारा ऑपरेशनल (Operational) हो सकेगी।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अनुसार, NVS-03 का प्रक्षेपण मई 2026 के मध्य में श्रीहरिकोटा से GSLV मार्क-2 रॉकेट के जरिए प्रस्तावित है। शुरू में 15 मई के आसपास लॉन्च की तैयारी बताई जा रही थी, लेकिन तकनीकी और शेड्यूल कारणों से इसे थोड़ा आगे बढ़ाया गया है। यह उपग्रह GSLV से लॉन्च होगा, क्योंकि दो लगातार मिशनों में विफलता के बाद PSLV फिलहाल ग्राउंडेड है। विफलता निवारण समिति की रिपोर्ट आने और सुधार लागू होने के बाद ही PSLV दोबारा उड़ान भरेगा। ISRO ने नाविक को तुरंत सक्रिय करने की जरूरत को देखते हुए GSLV का विकल्प चुना है।

नाविक प्रणाली क्यों जरूरी?

नाविक भारत और उसकी सीमाओं से 1500 किलोमीटर के दायरे में सटीक नेविगेशन, पोजिशनिंग और टाइमिंग (PNT) सेवाएं प्रदान करती है। यह सैन्य, नागरिक, परिवहन, आपदा प्रबंधन और कृषि जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विदेशी सिस्टम जैसे अमेरिकी जीपीएस पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने स्वदेशी नाविक विकसित किया। इसके जरिए स्टैंडर्ड पोजिशनिंग सर्विस (सिविलियन) और रेस्ट्रिक्टेड सर्विस (सैन्य) जैसी सेवाएं मिलेंगी।

क्यों ठप पड़ी प्रणाली?

नाविक के पूर्ण परिचालन के लिए कम से कम चार उपग्रह ऑपरेशनल होना अनिवार्य है। पिछले महीने मार्च 2026 में IRNSS-1F उपग्रह के अंतिम एटॉमिक क्लॉक के फेल होने से ऑपरेशनल उपग्रहों की संख्या घटकर 3 रह गई थी। जिसमे IRNSS-1B, IRNSS-1I और NVS-01 शामिल है। इससे पूरी प्रणाली PNT सेवाओं के लिए अनुपयोगी हो गई। कई पुराने उपग्रहों में विदेशी एटॉमिक क्लॉक फेल हो चुके हैं, जबकि नई पीढ़ी के उपग्रहों में स्वदेशी क्लॉक लगाए गए हैं। NVS-02 पिछले साल जनवरी 2025 में लॉन्च हुआ था, लेकिन प्रोपल्शन फॉल्ट के कारण इच्छित कक्षा में नहीं पहुंच सका। अब NVS-03 के बाद NVS-04 और NVS-05 भी लॉन्च किए जाने हैं। इसके जरिए भविष्य में नाविक की क्षमता और मजबूत होगी।

NVS-03 के लॉन्चिंग की तैयारी पूरी

ISRO के वैज्ञानिक श्रीहरिकोटा, बेंगलूरु और अन्य केंद्रों पर NVS-03 की अंतिम असेंबली और टेस्टिंग में जुटे हैं। सफल लॉन्च के बाद चार उपग्रह ऑपरेशनल हो जाएंगे और नाविक प्रणाली दोबारा सक्रिय हो जाएगी। यह मिशन भारत की स्वदेशी स्पेस टेक्नोलॉजी और रणनीतिक स्वतंत्रता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण विश्वसनीय कवरेज के लिए सात उपग्रह आदर्श होते हैं, लेकिन न्यूनतम चार से काम चल सकता है। NVS-03 के प्रक्षेपण के साथ ISRO नाविक को फिर मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है।