
लेट ईमेल और दूर परीक्षा केंद्र के कारण हजारों उम्मीदवार परीक्षा से चूके | फोटो सोर्स- x(@Binuiv)
JSSC Admit Card: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा में सिस्टम की एक बड़ी लापरवाही ने लाखों युवाओं के भविष्य पर पानी फेर दिया। 19 जुलाई को आयोजित हुई इस परीक्षा में करीब 75% छात्र शामिल ही नहीं हो सके। दो साल से इस भर्ती का इंतजार कर रहे छात्रों का आरोप है कि आयोग ने उनके परीक्षा केंद्र घर से 300 से 550 किलोमीटर दूर बना दिए। हद तो तब हो गई जब एडमिट कार्ड की सूचना देने वाला आधिकारिक ईमेल छात्रों को परीक्षा खत्म होने के बाद मिला। इस बदइंतजामी की वजह से 3.22 लाख छात्रों में से करीब 2.36 लाख छात्र एग्जाम दिए बिना ही रह गए।
JSSC ने साल 2024 में फील्ड वर्कर के 510 पदों के लिए यह भर्ती निकाली थी। जिसमें 3 लाख 22 हजार से अधिक उम्मीदवारों ने फॉर्म भरा था। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस परीक्षा में उपस्थिति बहुत ही कम रही। पंजीकृत अभ्यर्थियों में से केवल 86,444 उम्मीदवार ही एग्जाम देने पहुंचे, यानी लगभग 26% उपस्थिति ही दर्ज हुई। करीब 2 लाख 36 हजार छात्रों की परीक्षा छूट गई।
परीक्षा न दे पाने वाले छात्रों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उनके घर से सेंटर बहुत दूर थे। साहिबगंज के रहने वाले रूपेश ने बताया कि उनका सेंटर 550 किलोमीटर दूर गुमला में डाल दिया गया था। वहीं पूर्वी सिंहभूम की लिपिका का सेंटर 300 किलोमीटर दूर हजारीबाग में था।
छात्रों का कहना है कि झारखंड में लगातार भारी बारिश हो रही थी, जिससे ट्रेनें लेट थी। ऐसे में सिर्फ 3-4 दिन पहले इतनी दूर जाने का इंतजाम करना, टिकट बुक करना और रहने-खाने का खर्च उठाना गरीब परिवारों के लिए मुमकिन नहीं था। बिहार के भी कई उम्मीदवार इस दूरी और बदइंतजामी के कारण परीक्षा नहीं दे पाए।
छात्रों की सबसे बड़ी शिकायत एडमिट कार्ड की सूचना को लेकर है। कई छात्रों का कहना है कि उनको एडमिट कार्ड का सरकारी ईमेल 19 जुलाई की दोपहर को मिला, जब परीक्षा चल रही थी। कुछ छात्रों को तो 20 जुलाई को मेल आया, जब परीक्षा खत्म हुए 24 घंटे हो चुके थे। वहीं दूसरी तरफ JSSC के सचिव सुधीर गुप्ता का कहना है कि आयोग ने परीक्षा से जुड़ी सारी जानकारी और एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का लिंक समय रहते अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया था। छात्रों को वहां से इसे चेक करना चाहिए था।
इस मामले पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले शिक्षकों का कहना है कि यह एक बड़ी व्यवस्थागत विफलता है। 5 जुलाई से परीक्षा को बढ़ाकर 19 जुलाई किया गया था। दो साल पुरानी भर्ती के लिए हर छात्र का रोजाना वेबसाइट चेक करना संभव नहीं है, खासकर ग्रामीण इलाकों के उन छात्रों के लिए जिनके पास स्मार्टफोन या बेहतर इंटरनेट की सुविधा नहीं है। दूर-दराज के जिलों में सेंटर देने से कई लाचार और जरूरतमंद अभ्यर्थी परीक्षा देने से चूक गए।
Updated on:
23 Jul 2026 01:36 pm
Published on:
23 Jul 2026 01:36 pm
