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मालदा में न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे तक बंधक बनाया, आधी रात जागते रहे सीजेआइ, सुप्रीम कोर्ट की बंगाल सरकार को फटकार

पश्चिम बंगाल के मालदा में वोटर लिस्ट सुनवाई के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों को नौ घंटे बंधक बनाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त हुआ। कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए CBI या NIA जांच के आदेश दिए और अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए।

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भारत

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Anurag Animesh

Apr 03, 2026

CJI Surya Kant And Mamata Banerjee

CJI Surya Kant And Mamata Banerjee

Bengal Assembly Election 2026: विधानसभा चुनाव के बीच पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक गांव में बुधवार शाम वोटर लिस्ट पर आपत्तियां सुन रहे तीन महिला न्यायिक अधिकारियों सहित सात न्यायिक अधिकारियों को रात एक बजे तक नौ घंटे तक 'लोगों' ने बंधक बनाए रखा। कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के कहने पर भी तत्काल कार्रवाई नहीं हुई और बंधक अफसरों को छुड़ाने के दिए देश के चीफ जस्टिस (सीजेआइ) सूर्यकांत आधी रात तक जागते रहे और रात एक बजे बंधक अधिकारी छूटे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गुरुवार को स्वत: प्रसंज्ञान से याचिका दर्ज कर पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि राज्य की कानून-व्यवस्था लचर है और यह घटना इस अदालत पर दबाव बनाने व चुनौती देने जैसी है क्योंकि न्यायिक अधिकारियों की तैनाती सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई थी।

सीजेआइ सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपिन पंचोली की बेंच ने पूरी घटना की सीबीआइ या राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) से जांच कराने के निर्देश दिए और राज्य सरकार, मुख्य सचिव, जिला मजिस्ट्रेट व एसपी को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया। उन्हें अगली सुनवाई छह अप्रेल को वर्चुअल मौजूद रहने का भी निर्देश दिया।

11 बजे तक कलक्टर नहीं था, मुझे मौखिक आदेश देने पड़े: सीजेआइ


सीजेआइ सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी को फटकार लगाते हुए कहा कि रात 11 बजे तक आपका कलक्टर वहां नहीं था। मुझे रात में मौखिक रूप से बहुत सख्त आदेश देने पड़े। पांच साल के बच्चे को खाना-पानी नहीं दिया गय। गुरुस्वामी ने कहा कि यह गैर-राजनीतिक विरोध था तो सीजेआइ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि फिर नेता क्या कर रहे थे? बंगाल सबसे ज्यादा ध्रुवीकरण वाला प्रदेश बन गया है। जस्टिस बागची ने कहा सभी नेता एक जैसी भाषा बाेलते हैं। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के दखल के बाद रात 12 बजे के बाद अफसरों को को रिहा किया गया तो लौटते समय उनके वाहनों पर पथराव व हमला किया गया। यह प्रशासन की आपराधिक विफलता, अदालत पर दबाव और एसआइआर प्रक्रिया में बाधा डालने का सुनियोजित प्रयास है। हम इसकी अनुमति नहीं देंगे।

ये दिए निर्देश

  • घटना की जांच सीबीआइ या एनआइए को सौंपें, वह प्रारंभिक रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को दें।
  • न्यायिक अधिकारियों के सुरक्षित कामकाज के लिए चुनाव आयोग (ईसी) केंद्रीय बल तैनात करे।
  • न्यायिक अधिकारियों के परिवार को खतरे का तत्काल आंकलन कर आवास पर भी सुरक्षा बल तैनात हो।
  • अधिकारियों को सौंपे गए कार्य के सुचारू संचालन के लिए ईसी और राज्य सरकार जरूरी उपाय करें।
  • सुनवाई परिसर में दो-तीन से अधिक व्यक्तियों को प्रवेश की अनुमति न दें,पांच से अधिक व्यक्ति एकत्र नहीं होने के जरूरी उपाय करें।
  • मुख्य सचिव, डीजीपी और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी उक्त निर्देशों की अनुपालना रिपोर्ट पेश करें।