
CJI Surya Kant And Mamata Banerjee
Bengal Assembly Election 2026: विधानसभा चुनाव के बीच पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक गांव में बुधवार शाम वोटर लिस्ट पर आपत्तियां सुन रहे तीन महिला न्यायिक अधिकारियों सहित सात न्यायिक अधिकारियों को रात एक बजे तक नौ घंटे तक 'लोगों' ने बंधक बनाए रखा। कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के कहने पर भी तत्काल कार्रवाई नहीं हुई और बंधक अफसरों को छुड़ाने के दिए देश के चीफ जस्टिस (सीजेआइ) सूर्यकांत आधी रात तक जागते रहे और रात एक बजे बंधक अधिकारी छूटे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गुरुवार को स्वत: प्रसंज्ञान से याचिका दर्ज कर पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि राज्य की कानून-व्यवस्था लचर है और यह घटना इस अदालत पर दबाव बनाने व चुनौती देने जैसी है क्योंकि न्यायिक अधिकारियों की तैनाती सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई थी।
सीजेआइ सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपिन पंचोली की बेंच ने पूरी घटना की सीबीआइ या राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) से जांच कराने के निर्देश दिए और राज्य सरकार, मुख्य सचिव, जिला मजिस्ट्रेट व एसपी को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया। उन्हें अगली सुनवाई छह अप्रेल को वर्चुअल मौजूद रहने का भी निर्देश दिया।
सीजेआइ सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी को फटकार लगाते हुए कहा कि रात 11 बजे तक आपका कलक्टर वहां नहीं था। मुझे रात में मौखिक रूप से बहुत सख्त आदेश देने पड़े। पांच साल के बच्चे को खाना-पानी नहीं दिया गय। गुरुस्वामी ने कहा कि यह गैर-राजनीतिक विरोध था तो सीजेआइ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि फिर नेता क्या कर रहे थे? बंगाल सबसे ज्यादा ध्रुवीकरण वाला प्रदेश बन गया है। जस्टिस बागची ने कहा सभी नेता एक जैसी भाषा बाेलते हैं। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के दखल के बाद रात 12 बजे के बाद अफसरों को को रिहा किया गया तो लौटते समय उनके वाहनों पर पथराव व हमला किया गया। यह प्रशासन की आपराधिक विफलता, अदालत पर दबाव और एसआइआर प्रक्रिया में बाधा डालने का सुनियोजित प्रयास है। हम इसकी अनुमति नहीं देंगे।
Updated on:
03 Apr 2026 06:59 am
Published on:
03 Apr 2026 06:56 am
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