
दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की उमर खालिद केस में प्रतिक्रिया, photo source@ANI
Delhi riots 2020: दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एपी शाह ने उमर खालिद की लगातार जारी न्यायिक हिरासत पर तीखी टिप्पणी की है। उमर खालिद 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपी हैं। न्यायमूर्ति शाह ने कहा कि खालिद जैसे राजनीतिक असंतुष्ट वर्षों से जेल में हैं, जबकि कई जघन्य अपराधों के दोषियों को राहत मिल जाती है।
पूर्व न्यायमूर्ति शाह ने कहा कि उमर खालिद की गिरफ्तारी देश की सबसे चर्चित गिरफ्तारियों में से एक रही है। उन्होंने कहा, उन पर सात वर्षों से मुकदमा चल रहा है, जबकि हिंसक हत्याओं सहित कुछ सबसे जघन्य अपराधों के दोषियों को बड़ी आसानी से जमानत या सजा में राहत मिल जाती है। उत्तर भारत के एक धर्मगुरु का भी उदाहरण सामने है, लेकिन खालिद जैसे राजनीतिक असंतुष्ट आज भी सलाखों के पीछे हैं।
पूर्व न्यायमूर्ति शाह गोवा में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित 'नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा में न्यायपालिका की भूमिका' विषय पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में अभी भी कुछ स्वतंत्र सोच वाले न्यायाधीश हैं, लेकिन उनकी संख्या लगातार घटती जा रही है। उन्होंने कहा, "मुझे इस बात की गहरी चिंता है कि हालांकि देश में कुछ स्वतंत्र सोच वाले न्यायाधीश अभी भी मौजूद हैं, लेकिन उनकी संख्या दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है।
पूर्व न्यायमूर्ति शाह ने कहा कि लोकतंत्र में आलोचना का जवाब उसे दबाकर नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "आलोचना का सबसे अच्छा जवाब उसे दबाना नहीं, बल्कि आलोचक से बातचीत करना और उसके सवालों का जवाब देना है। दुर्भाग्य से, आज सत्ता में बैठे लोग इस सिद्धांत को भूल चुके हैं। कार्यकर्ताओं, असंतुष्टों और राजनीतिक कार्टूनिस्टों को चुप कराने और परेशान करने के लिए विभिन्न कानूनों और सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि युवाओं का कोई समूह किसी राजनेता के इस्तीफे या जवाबदेही की मांग करता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक एफआईआर दर्ज कर दी जाती है और लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
Updated on:
01 Aug 2026 03:57 pm
Published on:
01 Aug 2026 03:21 pm
