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काकोरी कांड की पूरी कहानी, जिसने भारत में आजादी की ज्वाला भड़का दी

9 अगस्त 1925 के काकोरी कांड ने अंग्रेजी हुकूमत को सीधी चुनौती देते हुए स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। इस ऐतिहासिक घटना की वर्षगांठ पर गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने क्रांतिकारियों को नमन किया और उनके बलिदान को याद किया।
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भारत

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kamlesh sharma

Aug 09, 2026

Kakori Train Action

Kakori Train Action (Photo: X/@ChouhanShivraj)

Kakori Train Action : नई दिल्ली। देश की आजादी के संघर्ष में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने अंग्रेजी शासन की नींव तक हिला दी। इन्हीं में से एक था 9 अगस्त 1925 का काकोरी कांड, जब हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन (HRA) से जुड़े 10 क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाना लूटकर ब्रिटिश सत्ता को खुली चुनौती दी। अंग्रेजों के अत्याचार से देश में आक्रोश चरम पर था। क्रांतिकारी यह समझ चुके थे कि आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए धन और हथियार जरूरी हैं। इसी उद्देश्य से पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, ठाकुर रोशन सिंह समेत अन्य साथियों ने योजना बनाई। वहीं 'काकोरी ट्रेन एक्शन' की वर्षगांठ पर गृह मंत्री अमित शाह सहित कई नेताओं ने क्रांतिकारियों को नमन किया है।

ट्रेन रोककर लूटा खजाना

9 अगस्त 1925 को काकोरी रेलवे स्टेशन से चली ट्रेन में अंग्रेजी हुकूमत का खजाना ले जाया जा रहा था। हरदोई और लखनऊ के बीच, लखनऊ से करीब 8 मील पहले क्रांतिकारियों ने ट्रेन को रोक लिया। इसके बाद सरकारी खजाने को लूट लिया गया। उस समय यह रकम करीब 8 हजार रुपये थी, जो आज के हिसाब से बड़ी रकम मानी जाती है।

माउजर पिस्टल से की फायरिंग

घटना के दौरान दोनों ओर से गोलीबारी भी हुई। क्रांतिकारियों ने जर्मनी निर्मित माउजर पिस्टल का इस्तेमाल किया। इस घटना में एक यात्री की मौत हो गई। अंग्रेजों के लिए यह घटना चौंकाने वाली थी, क्योंकि वे भारतीयों को केवल अहिंसा के मार्ग पर चलने वाला मानते थे।

40 लोगों पर चला मुकदमा

काकोरी कांड के बाद ब्रिटिश सरकार में हड़कंप मच गया। हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन के करीब 40 सदस्यों पर मामला दर्ज किया गया। कई क्रांतिकारियों को गिरफ्तार किया गया और लंबा मुकदमा चला। 1927 में अंग्रेजी हुकूमत ने रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा सुनाई। उन्हें बचाने के प्रयास भी हुए, जिनमें मदन मोहन मालवीय की कोशिशें शामिल थीं, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने फैसला नहीं बदला।

आजादी की ज्वाला हुई तेज

काकोरी कांड ने पूरे देश में स्वतंत्रता की लड़ाई को नई दिशा दी। इन क्रांतिकारियों के बलिदान ने लोगों के भीतर अंग्रेजों के खिलाफ आक्रोश को और भड़का दिया, जिसने आगे चलकर आजादी के आंदोलन को मजबूत बनाया।

गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने किया नमन

'काकोरी ट्रेन एक्शन' की वर्षगांठ पर गृह मंत्री अमित शाह सहित कई नेताओं ने क्रांतिकारियों को नमन किया है। गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट लिखा कि काकोरी ट्रेन एक्शन स्वतंत्रता संग्राम का वह अविस्मरणीय अध्याय है, जिसने अंग्रेजी हुकूमत के अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति को नई ऊर्जा दी। चंद्रशेखर आजाद जी और राम प्रसाद बिस्मिल जी के नेतृत्व में वीर स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने अदम्य साहस और समर्पण से इस एक्शन के माध्यम से ब्रिटिश शासन को यह बता दिया कि इस देश के संसाधनों पर देशवासियों का ही अधिकार है। देश काकोरी ट्रेन एक्शन के सभी अमर क्रांतिकारियों का सदैव ऋणी रहेगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "काकोरी ट्रेन एक्शन की वर्षगांठ पर मां भारती की सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी अमर सपूतों शत-शत नमन करता हूं! इस ऐतिहासिक घटना ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई गति और ऊर्जा प्रदान करते हुए जन-जन को देश की स्वतंत्रता के लिए जागृत किया। मातृभूमि की रक्षा के लिए मर-मिटने वाले अमर बलिदानियों की गौरव गाथा सदैव भावी पीढ़ियों को गौरवान्वित करती रहेगी। भारत माता की जय!"

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