
पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने PM मोदी पर कसा तंज (सोर्स: पीटीआई)
IAS Kannan Gopinathan Resignation Case: कन्नन गोपीनाथन ने एक बार फिर अपने 2019 से लंबित IAS इस्तीफे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- प्रिय PM नरेंद्र मोदी जी, अब जब आपने इस्तीफे लेना शुरू कर दिया है, तो प्लीज मेरा भी इस्तीफा स्वीकार कर लीजिए। 7 साल हो गए हैं।
बता दें पूर्व आईएएस कन्नन गोपीनाथन 2012 बैच के AGMUT कैडर के IAS अधिकारी रहे हैं। उन्होंने अगस्त 2019 में अधिकारी पद से इस्तीफा दिया था। लेकिन अब तक उनके इस्तीफे पर अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें अभी भी सरकारी सैलरी मिल रही है। इस पर उन्होंने जवाब दिया, "न कोई सैलरी, न कोई सस्पेंशन, कुछ भी नहीं। बस मेरा इस्तीफा दबाकर रखा गया है।
एक अन्य यूजर ने मजाक में उन्हें इंस्टाग्राम पर पोस्ट करने की सलाह दी। इस पर गोपीनाथन ने तंज कसते हुए लिखा- कैमरा एंगल सेट कर रहा हूं…नया टेलीप्रॉम्प्टर भी ले रहा हूं।
कन्नन गोपीनाथन का कहना है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद सरकार की कार्रवाई का विरोध करते हुए इस्तीफा दिया था। उनका कहना था कि सरकार का फैसला अलग बात है, लेकिन पूरे राज्य में संचार सेवाएं बंद करना, नेताओं और पत्रकारों को हिरासत में रखना और आम लोगों की आवाज सीमित करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ था। इसी वजह से उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला लिया और आज भी अपने उस निर्णय पर कायम हैं।
इसके अलावा गोपीनाथन 2018 में केरल की बाढ़ के दौरान राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने और बाद में CAA के खिलाफ अपनी आवाज उठाने को लेकर भी चर्चा में रहे थे। पिछले साल वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
कन्नन गोपीनाथन के मुताबिक, इस्तीफा देने के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई थी। हालांकि बाद में वह मामला बंद हो गया। इसके बावजूद उनके इस्तीफे पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका मामला लंबे समय तक गृह मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के बीच लंबित रहा। इसी वजह से इस्तीफे को अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी।
गोपीनाथन ने यह भी कहा कि उनके कई बैचमेट्स के इस्तीफे मंजूर हो चुके हैं। उन्होंने पूर्व IAS अधिकारी शशिकांत सेंथिल का उदाहरण दिया, जिनका इस्तीफा कुछ वर्षों बाद स्वीकार कर लिया गया था।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब उन्हें न ही वेतन मिल रहा है और न ही सेवा में सक्रिय माना जा रहा है, तो फिर उनके इस्तीफे पर फैसला लेने में इतनी देरी क्यों हो रही है? फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Updated on:
27 Jul 2026, 6:25 PM IST
Published on:
27 Jul 2026, 6:25 PM IST
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