
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (Photo - IANS)
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच खींचतान लंबे समय से जारी है। शिवकुमार समर्थकों का दावा है कि सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद संभालते समय आधे कार्यकाल के बाद कुर्सी छोड़ने का वादा किया था, लेकिन अब वह इससे पीछे हटते नजर आ रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि सिद्धारमैया सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं हैं। वहीं, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इस तरह के किसी भी वादे से साफ इनकार कर चुके हैं।
कर्नाटक की सत्ता को लेकर चल रहा यह विवाद अब कांग्रेस आलाकमान यानी राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी तक पहुंच चुका है। हालात को संभालने के प्रयास भी किए गए, लेकिन वे नाकाफी साबित हुए। कई बार इस बात की भी चर्चा हुई कि सिद्धारमैया अपने किसी करीबी नेता को मुख्यमंत्री पद सौंप सकते हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई बदलाव देखने को नहीं मिला। इसी सियासी खींचतान के बीच एक तीसरा मोर्चा भी खुलता हुआ नजर आ रहा है।
दरअसल, एससी-एसटी और लिंगायत समुदाय के विधायकों की बेंगलुरु में अलग-अलग बैठकें हुई हैं। इन बैठकों में विधायकों ने इच्छा जताई कि उनके समुदाय से किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाया जाए। यदि ऐसा संभव न हो, तो कम से कम कैबिनेट फेरबदल के दौरान उन्हें अधिक से अधिक मंत्री पद दिए जाएं।
सोमवार को लिंगायत विधायकों की बैठक राज्य के उद्योग मंत्री एमबी पाटिल की अध्यक्षता में हुई, जबकि मंगलवार शाम एससी-एसटी वर्ग के विधायकों की बैठक राज्य के गृहमंत्री जी परमेश्वर के आवास पर आयोजित की गई। इससे पहले नवंबर और दिसंबर में भी सिद्धारमैया और शिवकुमार गुट के बीच कई बैठकें हुई थीं, लेकिन सत्ता संतुलन में कोई बदलाव नहीं हुआ। हालांकि, विधायकों की इन ताजा बैठकों ने सत्ता के गलियारों में हलचल जरूर बढ़ा दी है।
कुछ रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि इन बैठकों का उद्देश्य अपने-अपने समुदाय की ताकत दिखाकर कांग्रेस आलाकमान पर दबाव बनाना है। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि एमबी पाटिल और जी परमेश्वर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खेमे से जुड़े माने जाते हैं। माना जा रहा है कि इन बैठकों के जरिए शिवकुमार गुट को जवाब देने और सिद्धारमैया पर पद छोड़ने के दबाव को कम करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, एमबी पाटिल ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि यह बैठक किसी खास मकसद से नहीं, बल्कि एक रूटीन बैठक थी और इसका सत्ता परिवर्तन या किसी व्यक्तिगत एजेंडे से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि लिंगायत समुदाय राज्य का सबसे बड़ा वर्ग है और इस समुदाय से 34 विधायक आते हैं। विधायकों का मानना है कि लिंगायत समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
गौरतलब है कि डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के प्रमुख नेता हैं, जो राज्य की दूसरी सबसे बड़ी आबादी मानी जाती है। वहीं, सबसे बड़ी संख्या लिंगायत समुदाय की है और एक समूह के तौर पर एससी-एसटी समुदाय की भी अच्छी खासी तादाद है। ऐसे में इन दोनों वर्गों के विधायकों की बैठकें कर शिवकुमार को बैकफुट पर लाने की रणनीति के संकेत मिल रहे हैं।
Updated on:
05 Feb 2026 03:00 pm
Published on:
05 Feb 2026 02:54 pm
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