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जांच करने वाले ED अधिकारी के खिलाफ CJI को भेज दिया ईमेल, कर्नाटक हाई कोर्ट ने ठोका 1 लाख का जुर्माना

Karnataka High Court: कर्नाटक हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। याचिकाकर्ता ने ईडी अधिकारी के खिलाफ शिकायत का मेल मुख्य न्यायाधीश व अन्य अधिकारियों को भेज दिया था। अदालत ने कहा- यह तरीका गलत और अदालती प्रक्रिया का अपमान है।
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भारत

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Mukul Kumar

Sep 02, 2026

nrhm tender scam supplementary chargesheet filed court accused surrenders

कोर्ट के संदर्भ में इस्तेमाल की गई प्रतीकात्मक तस्वीर। (फाइल फोटो- पत्रिका डिजाईन)

Karnataka News: कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना ठोक दिया है। वजह है कि उसने ईडी के एक अधिकारी के खिलाफ शिकायत का मेल मुख्य न्यायाधीश और दूसरे बड़े अधिकारियों तक भेज दिया था।

अदालत ने साफ कहा कि चल रही जांच में इस तरह संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को मेल भेजना गलत है। यह तरीका न तो सही है और न ही अदालती प्रक्रिया का सम्मान करता है।

ईमेल भेजने का तरीका अदालत को पसंद नहीं आया

याचिकाकर्ता फेयर वक्कायिल जॉन ने जुलाई में ईडी के डायरेक्टर को मेल लिखा था। उसमें उन्होंने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी उसके खिलाफ पक्षपाती हैं और उन्हें मामले से हटा दिया जाए।

इसी मेल की कॉपी मुख्य न्यायाधीश, दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस, वित्त मंत्री और ईडी के मुख्य सतर्कता अधिकारी को भी भेज दी गई। जब यही मामला कर्नाटक हाई कोर्ट में रिट याचिका के रूप में आया तो जस्टिस सूरज गोविंदराज ने इस तरीके पर सख्त नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि संवैधानिक अदालतें लंबित जांच के बारे में इस तरह के पत्र या ईमेल से प्रशासनिक शिकायतें नहीं सुनतीं।

बिना सबूत के आरोप नहीं चलेंगे

अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने जांच अधिकारी के खिलाफ सिर्फ सामान्य आरोप लगाए। कोई ठोस सबूत या सामग्री पेश नहीं की गई जिससे यह साफ हो कि जांच गलत इरादे से चल रही है या अधिकारी निष्पक्ष जांच नहीं कर सकता।

अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ शक या असंतोष के आधार पर जांच अधिकारी को बदलने का आदेश नहीं दिया जा सकता। जांच का सामना कर रहा व्यक्ति खुद चुन नहीं सकता कि कौन उसकी जांच करे।

हाई कोर्ट ने आदेश में साफ कहा- जब तक साफ पक्षपात, गलत इरादा या प्रक्रिया का दुरुपयोग साबित न हो, तब तक अधिकारी बदलने की मांग नहीं की जा सकती।

ऐसे व्यवहार पर जुर्माना जरूरी

अदालत ने कहा कि ऐसे मेल भेजने से लगता है कि याचिकाकर्ता अदालती रास्ते के बजाय बाहर से दखल चाहता था। यह संस्थागत अनुशासन के खिलाफ है। इसलिए उदाहरण पेश करने के लिए एक लाख रुपये का जुर्माना लगाना जरूरी है।

यह रकम कर्नाटक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करानी होगी। अदालत ने चेतावनी भी दी कि आगे ऐसा व्यवहार दोहराया गया तो और भारी जुर्माना लग सकता है।