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BCI पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, हर बड़े नीतिगत फैसले में AG- SG की भागीदारी अनिवार्य

Manan Kumar Mishra BCI: सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के कामकाज पर निगरानी बढ़ाते हुए अंतरिम व्यवस्था लागू की है। नए चुनाव होने तक BCI के महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य होगी। कोर्ट ने मौजूदा चेयरमैन के 2030 तक कार्यकाल के दावे पर भी सवाल उठाए हैं।
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भारत

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Ashib Khan

Sep 02, 2026

Supreme Court Bar Council of India

BCI पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती (फोटो सोर्स- IANS)

Supreme Court BCI Oversight:सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के कामकाज पर निगरानी बढ़ाते हुए बड़ा निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि जब तक नए चुनावों के जरिए बीसीआई (BCI) का पुनर्गठन नहीं हो जाता, तब तक काउंसिल के हर महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले में भारत के अटॉर्नी जनरल (AG) और सॉलिसिटर जनरल (SG) की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने साफ किया कि BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा का मौजूदा पद 2030 तक जारी रहने वाला कार्यकाल नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कहा कि नए चुनाव होने तक उनका बने रहना केवल अंतरिम या ‘प्रो-टेम’ व्यवस्था है। सीजेआई सूर्यकांत की पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। 

BCI के चुनाव और चेयरमैन के कार्यकाल पर सवाल

बता दें कि मामला राज्य बार काउंसिल के चुनाव से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान पेश हुए। उन्होंने BCI की 2025 की उन अधिसूचनाओं पर सवाल उठाया, जिनमें चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के कार्यकाल को पांच साल तक बढ़ाने का दावा किया गया था।

उन्होंने बताया कि मनन कुमार मिश्रा को 2 मार्च 2025 को चेयरमैन चुना गया था और उनका कार्यकाल 17 अप्रैल 2025 से शुरू होना बताया गया। वहीं, 9 जनवरी 2025 के एक प्रस्ताव के जरिए कार्यकाल को तीन साल से बढ़ाकर पांच साल करने की कोशिश की गई, जबकि BCI नियमों के नियम 12(2) में चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का कार्यकाल दो साल निर्धारित है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब नियम दो साल का कार्यकाल तय करते हैं, तो इसे पांच साल तक कैसे बढ़ाया जा सकता है।

‘2030 तक नहीं चल सकता मौजूदा नेतृत्व’

सुप्रीम कोर्ट में पीठ ने कहा कि नए चुने गए राज्य बार काउंसिलों को अधिवक्ता अधिनियम की धारा 4(1)(c) के तहत अपने प्रतिनिधियों का चुनाव BCI के लिए करना होगा। इसके बाद यही प्रतिनिधि BCI के नए चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का चुनाव करेंगे। पीठ ने स्पष्ट किया कि मौजूदा पदाधिकारी 2030 तक अनिश्चितकाल के लिए पद पर बने नहीं रह सकते।

हर बड़े नीतिगत फैसले में AG- SG की भागीदारी

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम अवधि के लिए तय किया कि BCI का रोजमर्रा का कामकाज मौजूदा व्यवस्था के तहत चलता रह सकता है। हालांकि, जब भी कोई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लिया जाएगा, उसमें अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सक्रिय भागीदारी जरूरी होगी। BCI की ओर से भी इस व्यवस्था पर सहमति जताई गई। कोर्ट ने राज्य बार काउंसिलों के पुनर्गठन के लिए चार सप्ताह का रोडमैप भी तय किया है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।

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