
Malda Voter List Row
Malda Voter List Row: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में वोटर लिस्ट से नाम कटने को लेकर भड़का गुस्सा हिंसक रूप ले लिया। विशेष गहन समीक्षा (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया के दौरान सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने कालियाचक-II ब्लॉक विकास कार्यालय (BDO) में तैनात सात न्यायिक अधिकारियों (जिनमें तीन महिलाएं शामिल) को नौ घंटे से ज्यादा समय तक घेर लिया। भीड़ ने अधिकारियों को भोजन और पानी तक नहीं पहुंचने दिया। इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई और मामले की जांच के आदेश दिए।
बुधवार शाम करीब चार बजे कालियाचक-II ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस के बाहर प्रदर्शन शुरू हुआ। प्रदर्शनकारी वोटर लिस्ट से अपने नाम हटाए जाने का विरोध कर रहे थे। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों से मिलने की मांग की, लेकिन जब मांग ठुकरा दी गई तो स्थिति बिगड़ गई। भीड़ ने अधिकारियों को घेर लिया और उन्हें बंधक जैसी स्थिति में रखा। पुलिस और केंद्रीय बलों को रात में हस्तक्षेप करना पड़ा। अंत में CAPF की मदद से अधिकारियों को रेस्क्यू किया गया।
इस घटना के बाद गुरुवार सुबह मालदा के ओल्ड मालदा ब्लॉक के मंगलबाड़ी इलाके में नारायणपुर बीएसएफ कैंप के पास नेशनल हाईवे-12 को जाम कर दिया गया। जदुपुर इलाके में भी हाईवे पर प्रदर्शन हुआ, जिससे यातायात ठप हो गया। जाम हटाने की कोशिश में पुलिसकर्मी घायल हुए, एक वाहन चालक को चोटें आईं। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़कर भीड़ को तितर-बितर किया। प्रदर्शनकारी मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के नाम जानबूझकर हटाए जाने का आरोप लगा रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि नाम वापस शामिल किए जाएं, वरना आंदोलन अनिश्चितकाल तक चलेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए पश्चिम बंगाल को देश का सबसे ज्यादा राजनीतिक रूप से बंटा हुआ राज्य बताया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने राज्य सरकार की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई और इसे न्यायपालिका पर हमला करार दिया। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को बिना सुरक्षा, भोजन और पानी के घंटों तक छोड़ दिया गया। राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी, मालदा के जिला मजिस्ट्रेट और एसपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता कुणाल घोष ने घटना की निंदा की और आरोप लगाया कि बीजेपी ने कुछ तत्वों को भड़काकर अशांति फैलाई है। TMC का कहना है कि वे कानूनी रास्ता अपनाएंगे और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि कानून-व्यवस्था बनी रहे। वहीं, विपक्षी दल इस घटना को ममता बनर्जी सरकार की विफलता बता रहे हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले SIR प्रक्रिया में लाखों नामों की समीक्षा हो रही है। इस विवाद ने राज्य की सियासत को और गरमा दिया है। मालदा में तनाव अभी भी बना हुआ है और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी से साफ है कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
Published on:
02 Apr 2026 04:38 pm
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