
Mallikarjun Kharge : हल्द्वानी कांड पर फिर गरजे खड़गे, नड्डा को लिखी चिट्ठी; 24 दिन की चुप्पी पर उठाया बड़ा सवाल (फोटो सोर्स: ANI)
Haldwani Purification Controversy: हल्द्वानी के रामलीला मैदान से शुरू हुआ ‘शुद्धिकरण’ विवाद अब संसद से निकलकर सीधे उत्तराखंड सरकार की जवाबदेही तक पहुंच गया है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखकर पुराने आश्वासन की याद दिलाई है। खरगे का सवाल सीधा है घटना को लेकर जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया गया था, फिर 24 दिन बाद भी कथित आयोजकों के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं हुई?
मल्लिकार्जुन खरगे ने 2 सितंबर को राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा को पत्र भेजा। इसमें उन्होंने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई अपनी जनसभा के बाद कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धिकरण’ की घटना पर कार्रवाई की मांग दोहराई। खड़गे ने नड्डा को 13 अगस्त को राज्यसभा में दिए उनके बयान की याद दिलाते हुए कहा कि मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया गया था।
खरगे के मुताबिक, सभा के बाद जिस मंच पर उन्होंने संबोधन किया था, वहां कथित तौर पर गोमूत्र और गोबर के इस्तेमाल के साथ हवन किया गया। पत्र में उन्होंने इसे महज व्यक्तिगत अपमान का मामला मानने से इनकार किया और इसे सामाजिक बराबरी तथा दलित सम्मान से जुड़ा सवाल बताया।
दरअसल, 8 अगस्त को खरगे ने हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद रामलीला मैदान में एक संगठन द्वारा हवन किए जाने की खबर सामने आई। कांग्रेस ने इसे जातिगत भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता से जोड़ा, जबकि आयोजकों ने अलग वजह बताई। उनका कहना था कि कार्यक्रम स्थल पर कथित तौर पर गंदगी और आपत्तिजनक नारेबाजी के बाद सफाई और धार्मिक अनुष्ठान किया गया था।
13 अगस्त को राज्यसभा में विवाद उठने पर नड्डा ने कहा था कि बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती और घटना की जांच कराई जाएगी। सभापति ने भी मामले की जांच और कार्रवाई की दिशा में सरकार को निर्देश दिया था।
अब खरगे का कहना है कि इतने दिन गुजरने के बावजूद कथित रूप से जिम्मेदार लोगों और संगठनों के खिलाफ एफआईआर नहीं होना सवाल खड़े करता है। उन्होंने नड्डा से आग्रह किया कि वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को आवश्यक निर्देश देकर प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया सुनिश्चित करें।
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। कांग्रेस लगातार इसे सामाजिक न्याय और संविधान में निहित समानता के सवाल से जोड़ रही है। वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी या आरएसएस का इस कथित अनुष्ठान से संबंध नहीं है।
इसी विवाद में नया मोड़ तब आया जब राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी में एफआईआर दर्ज हुई। कांग्रेस अब सवाल उठा रही है कि अगर कथित घटना पर कार्रवाई नहीं हुई, तो उसके खिलाफ आवाज उठाने वाले नेता पर मामला क्यों दर्ज किया गया।
इस बीच, कांग्रेस ने आंदोलन तेज करने के संकेत दिए हैं। यानी हल्द्वानी का यह विवाद अब सिर्फ एक मैदान में हुए अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा यह जातिगत भेदभाव, संवैधानिक समानता और राजनीतिक जवाबदेही की बड़ी बहस में बदल चुका है।
Updated on:
03 Sept 2026 10:28 am
Published on:
03 Sept 2026 10:09 am
