पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने अब विपक्षी एकता पर जोर देने का संदेश दिया है। टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि भाजपा उनका पहला और सबसे बड़ा दुश्मन है।
साथ ही ममता ने सभी विपक्षी दलों से अपील की कि INDIA गठबंधन के तहत एकजुट होकर लड़ाई लड़ी जाए। बता दें कि बंगाल में चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने INDIA गठबंधन के साथ हाथ मिलाने से साफ इनकार कर दिया था। उनकी पार्टी बंगाल चुनाव में अकेले मैदान में उतरी।
'मुझमें कोई अहंकार नहीं'
करारी हार के बाद ममता को INDIA गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ने का अफसोस हो रहा है। उन्होंने कहा- मैं चाहती हूं कि पश्चिम बंगाल में भाजपा से लड़ने के लिए सभी INDIA गठबंधन के तहत एकजुट हों। मुझमें कोई अहंकार नहीं है।
ममता बनर्जी ने कहा- अगर जरूरत पड़ी, तो मैं खुद CJP के विरोध-प्रदर्शन में जाऊंगी। उन्हें शुरू से ही हमारा समर्थन मिला है और आगे भी मिलता रहेगा।
ममता बनर्जी ने यह बयान 21 जुलाई को बंगाल में शहीद दिवस के मौके पर जनता को संबोधित करते हुए दी। यह दिवस 21 जुलाई, 1993 को एक रैली के दौरान 13 कांग्रेस युवाओं के मारे जाने पर मनाया जाता है। उस रैली का नेतृत्व ममता बनर्जी ने ही किया था।
हार के बाद बदला तेवर
पहले ममता अकेले लड़ने की रणनीति पर थीं, लेकिन अब वे कह रही हैं कि विपक्ष को एक होना होगा। उन्होंने लेफ्ट, अल्ट्रा-लेफ्ट, छात्र-युवा संगठनों और एनजीओ तक को BJP के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया है।
बंगाल में ममता बनर्जी की हार के बाद दूर हुए कई टीएमसी नेता
2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद पार्टी में बड़े पैमाने पर बगावत देखने को मिला। कई नेताओं ने पार्टी का साथ छोड़ दिया। वहीं, टीएमसी दो हिस्सों में भी बंट गई।
भाजपा ने 207 सीटें जीतीं, टीएमसी मात्र 80 सीटों पर सिमट गई। ममता बनर्जी खुद भवानीपुर सीट हार गईं। इससे पार्टी में गहरा संकट पैदा हुआ।
58 से ज्यादा टीएमसी विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अलग गुट बनाया। उन्हें विधानसभा स्पीकर ने बंगाल विपक्ष का नेता मान्यता दे दी। इसके अलावा, 20 से अधिक सांसद भी टीएमसी में बगावत करके एनडीए में शामिल हो गए।