
ममता बनर्जी (फाइल फोटो - एएनआई)
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की भतीजी की जान चली गई है। ममता बनर्जी की 28 साल की भतीजी ब्रिष्टि मुखर्जी का चयन बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन द्वारा 2016 में आयोजित राज्य-स्तरीय परीक्षा में हुआ था।
इसके बाद इस परीक्षा में नियुक्तियों को लेकर गड़बड़ियां सामने आईं। इन नियुक्तियों को पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने रद्द किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन (WBSSC) की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय चयन परीक्षा में ब्रिष्टि मुखर्जी का चयन हुआ। उन्होंने बोलपुर के एक अपर प्राइमरी स्कूल में गैर-शिक्षण कर्मचारी के तौर पर नौकरी की थी। लेकिन बाद में भर्ती प्रक्रिया में घोटाले की बात उजागर होने के चलते मार्च 2023 में बृष्टि की नौकरी चली गई।
इस मामले में करीब 26,000 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द कर दी गई थीं। नौकरी गंवाने वाले उम्मीदवारों की लिस्ट में उनका नाम 608वें नंबर पर था। आरोप था कि इन लोगों को पक्षपात और कथित तौर पर पैसे के लेन-देन के जरिए नियमों के खिलाफ नौकरी दी गई थी। लंबे समय तक ब्रिष्टि इस मामले को लेकर सदमे में थीं। अब घर पर उनकी लाश मिली है।
मृतका ब्रिष्टि मुखर्जी बीरभूम के रामपुरहाट स्थित कुसुम्बा गांव की रहने वाली थीं। उनके पिता निहार मुखर्जी, ममता बनर्जी के मामा के बेटे यानी उनके मातृ पक्ष के रिश्तेदार हैं। इसी के साथ निहार मुखर्जी स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेता भी हैं। परिवारजनों का कहना है कि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से एक दिन काम करने के बाद पद से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नौकरी जाने के बाद वे डिप्रेशन में चली गई थी।
पूरा मामला शुरू होता है साल 2016 से, जब पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन (WBSSC) की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय चयन परीक्षा में शिक्षक भर्ती से जुड़ा घोटाला सामने आया।
इसे ममता बनर्जी सरकार के 15 साल के कार्यकाल के दौरान सामने आए बड़े भ्रष्टाचार के मामलों में से एक माना गया। इस मामले में तत्कालिन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, कुछ विधायक, स्कूल सर्विस कमीशन और शिक्षा बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था।
Updated on:
01 Sept 2026 04:00 pm
Published on:
01 Sept 2026 03:47 pm
