
सीएम ममता बनर्जी। (फोटो- ANI)
पश्चिम बंगाल में इसी साल विधानसभा चुनाव होना है। सीएम ममता बनर्जी लगातार लोगों को अपने पाले में करने में जुटी है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। दुर्गा पूजा उत्सव को अस्थाई पंडालों से निकालकर स्थायी विरासत में बदल दिया जाएगा।
दरअसल, सदियों से दुर्गा पूजा की भावना बांस और कपड़े के अस्थायी पंडालों में बसती रही है, लेकिन यूनेस्को द्वारा दुर्गा पूजा को 'अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' का दर्जा मिलने के बाद अब पश्चिम बंगाल सरकार इसे एक स्थायी वैश्विक पहचान दे रही है। कोलकाता के न्यू टाउन में ऐसा सांस्कृतिक स्वप्न आकार ले रहा है, जो दुर्गा पूजा उत्सव को अस्थायी पंडालों से निकालकर स्थायी विरासत में बदल देगा। 17.28 एकड़ में फैल रहा यह भव्य परिसर दुनिया का सबसे बड़ा 'दुर्गा आंगन' बनने की ओर बढ़ रहा है। करीब 262 करोड़ की लागत से बन रहा यह प्रोजेक्ट अगले साल पूरा होने की उम्मीद है।
इस परिसर का हृदय होगा 54 मीटर (177 फीट) ऊंचा गर्भगृह, जो इसे क्षेत्र के सबसे ऊंचे धार्मिक ढांचों में शामिल करेगा। ऊंचाई के साथ-साथ इसकी वास्तुकला भी भक्ति और शक्ति का प्रतीक होगी।
परिसर में 108 देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और 64 सिंह प्रतिमाएं शामिल होगी। मंदिर के इस पूरे ढांचे को थामेंगे 1008 स्तंभ, जिनके बीच भव्य नक्काशीदार गलियारों से होकर श्रद्धालु गुजरेंगे।
यहां सांस्कृतिक संग्रहालय, दुर्गा पूजा के इतिहास को समर्पित गैलरी, पुरस्कार-विजेता झांकियां, पारंपरिक मूर्ति निर्माण कला और पंडाल आर्ट के विकास को दिखाया जाएगा। लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश, कार्तिक और शिव के लिए अलग-अलग मंडप होंगे।
यह गोल्ड-सर्टिफाइड ग्रीन बिल्डिंग होगी, जहां 300 पेड़ लगाए जाएंगे। केवल 20% क्षेत्र में एयर-कंडीशनिंग होगी, बाकी हिस्से प्राकृतिक रोशनी और हवा पर निर्भर रहेंगे। प्रतिदिन 1 लाख श्रद्धालुओं की क्षमता और 1,000 लोगों के बैठने वाला केंद्रीय प्रांगण इसे बड़ा धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र बनाएगा।
Published on:
06 Jan 2026 07:42 am
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