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Meenakshi Natarajan: सुप्रीम कोर्ट के नामांकन रद्द मामले में फैसले पर मीनाक्षी नटराजन का पहला रिएक्शन, बोलीं- ‘चाहे डेमोक्रेसी हारेगी या जीतेगी’

Congress Leader Meenakshi Natarajan: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज करते हुए चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। फैसले के बाद नटराजन ने इसे व्यक्तिगत हार नहीं बल्कि लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा मुद्दा बताया।

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भारत

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Anurag Animesh

Jun 12, 2026

Congress leader Meenakshi Natarajan

Meenakshi Natarajan: मीनाक्षी नटराजन(फोटो-ANI)

Meenakshi Natarajan On Supreme Court Verdict: कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी और साफ कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालत उसके बीच में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव से जुड़े मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की एक सीमा होती है। एक बार चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाए तो अदालत आम तौर पर उसमें दखल देने से बचती है। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद यह फैसला सुनाया। इस मामले में मीनाक्षी नटराजन का रिएक्शन भी सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना ​​है कि यह सवाल पूरे सिस्टम के सामने है, यह लोकतंत्र से जुड़ा सवाल है कि लोकतंत्र हारेगा या जीतेगा। यही हमारी मुख्य चिंता है।

मीनाक्षी नटराजन ने क्या कहा?


सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मीडिया से बात करते हुए मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह मामला हमारी पूरी पार्टी, संविधान और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा है। पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं से सलाह-मशविरा करके हम इसके लिए आगे कोई रणनीति बनाएंगे। आगे उन्होंने कहा कि मैं इसे बिल्कुल भी अपनी व्यक्तिगत हार के तौर पर नहीं देखती। मेरा मानना ​​है कि यह सवाल पूरे सिस्टम के सामने है। यह लोकतंत्र से जुड़ा सवाल है कि लोकतंत्र हारेगा या जीतेगा। यही हमारी मुख्य चिंता है।

जानें पूरा मामला


मामले में याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने उनके नामांकन को लेकर यह टिप्पणी की थी कि फॉर्म अधूरा भरा गया है और उनके खिलाफ चल रहे एक शिकायत संबंधी मामले की जानकारी भी नहीं दी गई। वहीं रिकॉर्ड में यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता ने उस मामले में पहले लिखित पक्ष रखा था, इसलिए उन्हें उससे जुड़ी जानकारी होने की बात कही गई।

मीनाक्षी नटराजन ने रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को चुनौती देते हुए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया था। उनकी ओर से कहा गया कि लिखित आवेदन देने के साथ-साथ 10 जून को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से भी अपनी बात रखी गई थी। इसके बावजूद आयोग की तरफ से कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया।

वकीलों ने कोर्ट में क्या कहा?


याचिकाकर्ता के वकीलों ने अदालत में यह भी तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 329(बी) के तहत चुनावी मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप पर जो रोक लगाई गई है, वह इस मामले में लागू नहीं होती। उनका कहना था कि याचिका का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को रोकना नहीं, बल्कि उसे निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरा कराना है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील से सहमत नहीं हुआ। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसके संचालन में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी गई।

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