
Congress leader Salman Khurshid (Photo- ANI)
Congress reaction on S. Jaishankar Statement: मिडिल-ईस्ट में जारी मौजूदा तनाव पर संसद में विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा दिए गए बयान की कांग्रेस ने आलोचना की है। कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग ने बयान में कहा, ''विदेश मंत्री के बयान में आश्चर्यजनक रूप से ‘IRIS Dena’ के डूबने पर कोई विरोध नहीं किया गया, जो भारतीय महासागर क्षेत्र में हमारे सुरक्षा प्रदानकर्ता के रूप में हमारे पद को प्रभावित करता है; न ही किसी संप्रभु देश के राज्य प्रमुख की हत्या की निंदा की गई; न ही हमारे सामने आने वाली गंभीर भू-आर्थिक और भू-राजनीतिक लागतों को कम करने के उपाय प्रस्तुत किए गए।"
कांग्रेस ने यह भी कहा कि इस बयान में भारत के रणनीतिक निवेश और व्यापार हितों की सुरक्षा के लिए ठोस प्रस्ताव नहीं दिए गए, जैसे कि कच्चे तेल का आयात, बासमती चावल का निर्यात और उर्वरक आपूर्ति। उन्होंने पश्चिम एशिया में लगभग नौ मिलियन भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। विदेश मंत्री का बयान यह भी नहीं बताता कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों को कैसे विविध करेगा या अपनी ऊर्जा संप्रभुता को कैसे पुनः स्थापित करेगा, जो विदेशी शक्तियों द्वारा निर्धारित की जा रही है।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल की यात्राओं के माध्यम से युद्ध का समर्थन न केवल यह धारणा पैदा करता है कि भारत ग्लोबल साउथ के नैतिक नेतृत्व से पीछे हट रहा है, बल्कि ऐसे कदम नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को कमजोर करने वाले प्रतीत होते हैं।
पार्टी का यह भी कहना है कि विदेश मंत्री का बयान बदलते वैश्विक परिदृश्य को लेकर किसी स्पष्ट दृष्टि या ठोस रणनीति को प्रस्तुत नहीं करता। इसके अलावा, कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की भी कड़ी आलोचना की। पार्टी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की विदेश नीति और भारतीय विदेश सेवा को कमजोर करने वाले कदम देश को रणनीतिक रूप से अन्य देशों पर निर्भर होने की स्थिति की ओर ले जा रहे हैं, जिससे स्वतंत्रता के बाद से बनाए गए द्विपक्षीय कूटनीतिक और रणनीतिक उपलब्धियां खतरे में पड़ रही हैं। कांग्रेस का यह बयान तब आया है जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी-इजराइली हमलों के बाद बढ़ते पश्चिम एशिया संकट पर संसद में जानकारी दी।
पश्चिम एशिया संघर्ष पर संसद के दोनों सदनों में सोमवार को सरकार की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आधिकारिक बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत शांति और कूटनीतिक समाधान का समर्थक है। संघर्ष क्षेत्र में भारतीय समुदाय की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक प्रवाह को सुरक्षित रखना भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
उन्होंने कहा कि दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे ट्रांजिट केंद्रों में फंसे भारतीयों की मदद के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। जहां हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से खुला था, वहां से अब तक करीब 67,000 भारतीयों को सुरक्षित भारत लाया जा चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घटनाओं पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCS) की बैठक के बाद पीएम ने यूएई, कतर, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, ओमान, जॉर्डन और इजरायल के शीर्ष नेताओं से बातचीत की, जिसमें इन देशों ने भारतीयों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया।
जयशंकर ने बताया कि संघर्ष के दौरान व्यापारिक जहाजों पर हमलों में दो भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक अभी भी लापता है।
एस. जयशंकर ने संसद में बताया कि ईरान के तीन जहाजों ने भारतीय बंदरगाहों पर डॉकिंग की अनुमति मांगी थी। इनमें से ‘आईरिस लावन’ नामक जहाज 4 मार्च को कोच्चि बंदरगाह पर पहुंचा। चालक दल फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में है। इस मानवीय कदम के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत का आभार व्यक्त किया है।
Published on:
10 Mar 2026 07:50 am
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