
Lok Sabha Elections 2024 : जहां केंद्र बनाम राज्य के परिदृश्य में चुनावी घमासान चरम पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के स्टार प्रचारक तमिलनाडु की भौगोलिक दूरी को नाप चुके हैं। इंडिया गठबंधन की कमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के हाथ में है। अन्य शब्दों में यह कह सकते हैं कि कांग्रेस का 'हाथ' भी उनके हाथ में ही है। वे चालीस की नौका पर सवारी कर रहे हैं और सहयोगियों की नैया भी पार लगाने में लगे हैं। चुनाव प्रचार की दशा-दिशा पूरी तरह पीएम बनाम सीएम दिख रही है। भाजपा का हिन्दुत्ववाद पीछे छूटता नजर आ रहा है। इस नीति की इक्का-दुक्का चर्चा अवश्य दिखती है लेकिन वह तूफान नदारद दिखता है जो उत्तर भारत में उठता या उठाया जाता है।
सनातन धर्म के खिलाफ हुई बयानबाजी का मसला भी आता है लेकिन वह क्षणभंगुर ही रहता है। साथ ही एनडीए अपने विकास कार्यों को ढाल बना रहा है। भाजपा के 400 पार के स्लोगन में हिमालयी दुविधा तमिलनाडु की है। पुदुचेरी की इकलौती सीट के साथ चालीस सीटों पर भाजपा नीत एनडीए जोर आजमाइश कर रहा है। त्रिकोणीय संघर्ष से मत बिखराव और अस्थिर अन्नाद्रमुक की वजह से द्रमुक अपना पलड़ा भारी मान रही है। भाजपा गठबंधन की निगाह उन मतदाताओं पर हैं, जो द्रविड़ राजनीति से ऊब चुके हैं। पिछले सालों की तुलना में मोदी की स्वीकारोक्ति इस गठबंधन को वोटों का फायदा पहुंचाने की स्थिति में है।
खुल पाएगा खाता?
द्रमुक ने सीट बंटवारे की नीति में ही स्पष्ट कर दिया था कि वह पिछले लोकसभा चुनाव के फॉर्मूले पर कायम है। सभी सहयोगी दलों को उसी अनुपात में सीटें मिली हैं। कांग्रेस तमिलनाडु में देश के अन्य प्रदेशों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में नजर आती है, जहां उसे मजबूत गठबंधन का साथ भी प्राप्त है। भाजपा गठबंधन इस चुनाव में फिर से खाता खोलने को बेताब दिखाई देती है। पिछले चुनाव में उसे एक भी सीट नहीं मिली थी, जबकि 2014 में उसके पेटे दो सीटें आई थीं। भाजपा फिलहाल पांच सीटों कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली, कोयम्बत्तूर, विरुदनगर और साउथ चेन्नई पर ज्यादा फोकस है। भाजपा नीत एनडीए को ४०० का आंकड़ा पार करने के लिए दक्षिण में मजबूती की जरूरत है। भाजपा इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद रैलियां करके राज्य में भाजपा के पक्ष में माहौल बना रहे हैं।
आरोप -प्रत्यारोप
आरोप यह है कि केंद्र का तमिलनाडु के साथ सौतेला व्यवहार है। संघीय व्यवस्था और राज्य की स्वायत्तता, हिन्दी थोपना व नीट की समाप्ति को मुद्दा बनाया जा रहा है। वहीं, भाजपा खेमा भ्रष्टाचार, वंशवाद और तमिलों को गरीब रखने के लिए द्रमुक को जिम्मेदार ठहरा रहा है।
Published on:
11 Apr 2024 09:38 am
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