
Mumbai Mall Incident(Photo-ANI)
Mumbai Mall Incident: मुंबई के एक लग्जरी मॉल में खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का अधिकारी बताने के आरोप में गिरफ्तार 24 वर्षीय युवक पर फर्जी PMO पहचान पत्र और दूसरे आधिकारिक डाक्यूमेंट्स तैयार करने का आरोप लगा है। पुलिस का दावा है कि इन डाक्यूमेंट्स को बनाने के लिए ChatGPT का इस्तेमाल किया गया था। मामले में आरोपी रोहन पारिख और उसके सहयोगी 49 वर्षीय दिलीप कुंडे को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। दोनों को हिरासत में रखने की अवधि खत्म होने के बाद पुलिस ने आगे की कस्टडी की मांग की थी। हालांकि, एस्प्लेनेड कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डीएस खेडेकर ने पुलिस की मांग खारिज करते हुए दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद दोनों ने जमानत के लिए आवेदन किया। आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि उन्हें आगे हिरासत में रखने की कोई जरूरत नहीं है।
पुलिस ने रिमांड आवेदन में कहा कि पारिख के घर की तलाशी के दौरान PMO से जुड़े अंग्रेजी भाषा में तैयार किए गए कई फर्जी दस्तावेज मिले। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन दस्तावेजों को तैयार करने के लिए ChatGPT का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस ने दावा किया कि पारिख ने पूछताछ के दौरान फर्जी PMO आईडी और उससे जुड़े दस्तावेज तैयार करने की बात कबूल की है। पुलिस के मुताबिक, वह 2025 से ऐसे दस्तावेज तैयार कर रहा था। जांच में इसके पीछे अपनी सामाजिक स्थिति और परिवार तथा परिचितों के बीच अपनी छवि बेहतर दिखाने की कोशिश को वजह बताया गया है।
जांचकर्ताओं को पारिख के मोबाइल फोन से PMO से जुड़े पत्र तैयार करने की जानकारी खोजे जाने के संकेत भी मिले हैं। पुलिस यह पता लगाना चाहती थी कि फर्जी पहचान पत्र या दस्तावेजों का इस्तेमाल कहीं और भी किया गया था या नहीं। इसी आधार पर उसने अतिरिक्त पुलिस हिरासत की मांग की थी।
मामले में दिलीप कुंडे की भूमिका को लेकर भी पुलिस ने कोर्ट में जानकारी दी। कुंडे पूर्व सेना कर्मी है और उसके पास से कथित तौर पर एक रिवॉल्वर बरामद की गई। पुलिस के अनुसार, कुंडे ने बताया कि वह हथियार निजी सुरक्षा के लिए रखता था। जांचकर्ताओं का आरोप है कि पारिख के पेशेवर बॉडीगार्ड के तौर पर काम करने के दौरान इस हथियार का इस्तेमाल व्यावसायिक तौर पर किया जा रहा था।
दोनों आरोपियों की ओर से वकील सतीश मानेशिंदे ने पुलिस की आगे की हिरासत की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपी पहले ही दस्तावेज तैयार करने की बात स्वीकार कर चुके हैं और इस मामले में किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और दूसरे दस्तावेज पहले ही जब्त कर चुकी है। ऐसे में अब आरोपियों से कोई और सामान बरामद करने की जरूरत नहीं है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने माना कि पुलिस की ओर से रिमांड बढ़ाने के लिए दिए गए आधार पर्याप्त नहीं हैं। इसके बाद पारिख और कुंडे को पुलिस हिरासत के बजाय 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
यह मामला 7 सितंबर को मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित जियो वर्ल्ड प्लाजा में सामने आया था। घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले दिन पास स्थित नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के कार्यक्रम में शामिल होने से एक दिन पहले हुई थी। पुलिस के मुताबिक, पारिख के पास फर्जी PMO कार्ड मिला था। उसके साथ मौजूद कुंडे के पास कथित तौर पर हथियार था। इसी बात को लेकर दोनों की मॉल के सुरक्षा कर्मचारियों से बहस हो गई। विवाद के दौरान पारिख ने कथित तौर पर खुद को PMO का अधिकारी बताया। बाद में पुलिस ने स्पष्ट किया कि मॉल में हुई यह घटना अगले दिन प्रधानमंत्री के निर्धारित कार्यक्रम से जुड़ी नहीं थी।
Updated on:
11 Sept 2026 07:44 pm
Published on:
11 Sept 2026 07:44 pm
