10 सितंबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

नेपाल की बालेन शाह सरकार से तीसरे मंत्री ने छोड़ा पद, बाढ़ के बीच रसोई गैस की किल्लत पर बयान देने के बाद गरमाया मामला

Gauri Kumari Yadav Resignation: नेपाल में लंबे समय से चल रहे रसोई गैस संकट के बीच उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्री गौरी कुमारी यादव ने इस्तीफा दे दिया है। वह बालेन शाह सरकार से इस्तीफा देने वाली तीसरी मंत्री हैं।
2 min read
Google source verification
nepal

nepal

Nepal Gas Crisis: नेपाल की बालेन शाह सरकार में एक और नया इस्तीफा देखने को मिला है। गुरुवार को उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्री गौरी कुमारी यादव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले ही उन्होंने लंबे समय से नेपाल में चल रही रसोई गैस की आपूर्ति में कमी को लेकर निजी गैस कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। साथ ही देश में काम कर रही सभी 58 गैस कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने की भी बात कही थी। नेपाल में बाढ़ के बाद ऐसी समस्या देखने को मिली है।

प्रधानमंत्री बालेन शाह को भेजा इस्तीफा

गौरी कुमारी यादव ने गुरुवार को प्रधानमंत्री बालेन शाह को अपना इस्तीफा सौंप दिया। मंत्री के सचिवालय ने उनके इस्तीफे की जानकारी दी, लेकिन इस्तीफा देने का कारण नहीं बताया। गौरी बालेन शाह की सरकार से इस्तीफा देने वाली तीसरी मंत्री हैं। इससे पहले पूर्व श्रम मंत्री दीपक कुमार साह और पूर्व गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने इस्तीफा दिया था। यह सरकार इसी साल मार्च के आखिर में बनी थी।

48 हजार सिलेंडर भेजे, लेकिन पहुंचे सिर्फ 20 हजार

गौरी ने बुधवार को संघीय संसद की उद्योग समिति की बैठक में कहा था कि यह देश के लिए शर्मनाक स्थिति है कि उपभोक्ताओं को पैसे देने के बाद भी रसोई गैस नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि गैस कंपनियां सरकार और नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन के निर्देशों का भी पालन नहीं कर रही हैं। गौरी ने दावा किया था कि हाल ही में काठमांडू घाटी के लिए 48 हजार गैस सिलेंडर भेजे गए थे, लेकिन बाजार तक केवल 19 से 20 हजार सिलेंडर ही पहुंचे। उन्होंने सवाल उठाया था कि बाकी सिलेंडर कहां गए, इसकी किसी को जानकारी नहीं है।

प्राइवेट कंपनियों पर सहयोग नहीं करने का आरोप

नेपाल में फिलहाल 58 प्राइवेट गैस कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें साल्ट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन भी शामिल है। यादव ने कहा था कि अगर सभी 58 कंपनियां रोजाना काठमांडू में 3,000-3,000 सिलेंडर भेजतीं तो आज यह संकट पैदा नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा था कि नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन को अपनी गैस कंपनियां स्थापित कर उन्हें खुद चलाना चाहिए।

58 गैस कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने की कही थी बात

उन्होंने कहा था कि अगर गैस कंपनियां सरकार का सहयोग नहीं करती हैं तो उनके लाइसेंस रद्द करने पर विचार करना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया था कि गैस डीलर जमाखोरी करके कमी पैदा कर रहे हैं और सरकार के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन ने शायद 10 बार लिखा होगा लेकिन फिर भी प्राइवेट गैस कंपनियां सिलेंडर नहीं दे रही हैं। इस पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या इसमें नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन शामिल है, या फिर सरकार की मिलीभगत है?