फ्रॉड का तरीका काफी सोफिस्टिकेटेड है। जालसाज फास्टैग एनुअल पास बेचने का दावा करते हुए फर्जी वेबसाइट्स बनाते हैं, जो ऑफिशियल NHAI पोर्टल जैसी दिखती हैं। ये वेबसाइट्स गूगल सर्च रिजल्ट्स में पेड एडवर्टाइजमेंट और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) की ट्रिक्स से टॉप पर आ जाती हैं। यूजर्स जब इन पर क्लिक करते हैं तो उन्हें वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर, मोबाइल नंबर, बैंक डिटेल्स और पेमेंट क्रेडेंशियल्स जैसे संवेदनशील जानकारी डालने को कहा जाता है। पेमेंट करने के बाद पैसे स्कैमर्स के अकाउंट में चले जाते हैं, लेकिन कोई वैध फास्टैग एनुअल पास जारी नहीं होता। कई मामलों में नकली रसीद या कन्फर्मेशन भेज दी जाती है, जिससे यूजर्स को बाद में पता चलता है कि उनका पैसा डूब गया है।