
मानसून सत्र की कार्रवाई के दौरान लोकसभा (फोटो - आईएएनएस)
Parliament Session: सोमवार को संसद का सत्र हंगामेदार रहने की संभावना है। विपक्षी दलों ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी की है। कांग्रेस के संगठन महासचिव व सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देते हुए मांग की है कि राम मंदिर दान घोटाले पर तुरंत चर्चा हो और इस मामले की जांच किसी सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में हो।
वेणुगोपाल ने अपने स्थगन प्रस्ताव में सीधा आरोप लगाया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर एक संगठित गिरोह काम कर रहा है। उनका कहना है कि लाखों श्रद्धालुओं ने जो नकदी और गहने दान किए, उन्हें व्यवस्थित तरीके से हड़पा गया है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर देश की आस्था के साथ धोखा बताया।
उन्होंने आगे कहा कि इस मामले की जांच कर रही SIT सिर्फ एक दिखावा है। क्योंकि, जांच टीम ने केवल छोटी मछलियों को ही गिरफ्तार किया है, जबकि घोटाले में शामिल बड़े व ताकतवर लोग बचाए जा रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे घेरा। उन्होंने कहा कि मंदिर के ट्रस्ट की नियुक्ति किसने की, उद्घाटन किसने किया, पूजा किसने शुरू करवाई और झंडा किसने लहराया, यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही किया। इसलिए जब उन्होंने ही सब कुछ किया है, तो जवाब भी उन्हीं को संसद में आकर देना चाहिए।
राम मंदिर मामले के अलावा INDIA गठबंधन के सांसद 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर भी गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग रहे हैं। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने इस मुद्दे पर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव पेश किया है।
सोमवार को विदेशी अंशदान नियमन संशोधन बिल 2026 पर भी विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। इस मामले में DMK व अन्य पार्टियों ने भी दूरी बरती है। FCRA बिल को लेकर आज राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक होगी। इस बैठक में विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर शामिल होंगे। कांग्रेस ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त तक सदन में मौजूद रहने का तीन-लाइन का व्हिप जारी कर दिया है।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी सोमवार को एक अहम मुद्दा उठाया है। उन्होंने लोकसभा में नए दल-बदल विरोधी कानून पर चर्चा के लिए प्रस्ताव दिया है। उनका कहना है कि नया कानून ऐसे दल-बदल को रोकना चाहिए, जो सिर्फ मौकापरस्ती की वजह से होते हैं, न कि किसी वैचारिक मतभेद के कारण। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि कानून में असहमति जताने की आजादी को भी सुरक्षित रखा जाना चाहिए। मौजूदा दल-बदल कानून 1985 में 52वें संवैधानिक संशोधन के जरिए संविधान में जोड़ा गया था।
तमिलनाडु से डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने राज्यसभा में कावेरी नदी विवाद पर चर्चा की मांग की है। उनका आरोप है कि कर्नाटक सरकार ने कावेरी जल नियमन समिति के आदेश को लागू नहीं किया और मेकेदातु में बांध बनाने की कोशिश जारी है, जिससे तमिलनाडु के किसानों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा आज लोकसभा में ट्रिब्यूनल सुधार बिल, खान और खनिज संशोधन बिल तथा केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने वाला बिल भी पेश किया जाएगा।
Updated on:
10 Aug 2026 09:52 am
Published on:
10 Aug 2026 09:52 am
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