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भारतीय किसानों, स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए खुलेंगे नए दरवाजे; भारत-यूके समझौते पर बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर बताया कि भारत-यूके संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि। यह जानकर खुशी हुई कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू होगा।

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Narendra Modi Keir Starmer

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूके प्रधानमंत्री कीर स्टारमर

India UK Comprehensive Economic and Trade Agreement: भारत और ब्रिटेन (UK) के बीच व्यापारिक और आर्थिक संबंधों के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर सहमति व्यक्त की है कि बहुप्रतीक्षित भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement - FTA) आगामी 15 जुलाई 2026 से लागू हो जाएगा। भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त (High Commissioner) लिंडी कैमरन ने सोशल मीडिया पर इस महत्वपूर्ण फैसले की पुष्टि की। इसके तुरंत बाद, फ्रांस के एवियन में G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक 'ऐतिहासिक मील का पत्थर' करार दिया।

पीएम मोदी ने ट्वीट कर जताई खुशी, बताया ऐतिहासिक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते की घोषणा करते हुए ट्वीट किया: 'भारत-UK संबंधों के लिए यह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह जानकर बेहद खुशी हुई कि भारत-UK व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। यह समझौता हमारे द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को काफी बढ़ावा देगा।'

पीएम मोदी ने आगे जोर देकर कहा कि इस समझौते के जरिए भारतीय किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई (MSMEs), स्टार्टअप्स और नए इनोवेटर्स के लिए वैश्विक बाजार में असीम अवसर खुलेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि यह ऐतिहासिक कदम साल 2047 तक 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

G7 समिट के बीच दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने जताई सहमति

वर्तमान में फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित G7 समिट से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच भी इस विषय पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने बताया कि वे और पीएम स्टार्मर, दोनों ही हमारे द्विपक्षीय और आर्थिक संबंधों को मिल रही इस नई व जबरदस्त गति से बेहद खुश हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते (CETA) के लागू होने से भारत के कपड़ा, चमड़ा, आभूषण और सेवा क्षेत्र (IT & Services) को ब्रिटिश बाजार में बड़ी रियायतें मिलेंगी, जबकि ब्रिटेन को भी भारतीय बाजार में निवेश के नए और सुगम रास्ते मिलेंगे। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच यह डील दोनों देशों की जीडीपी और रोजगार के मोर्चे पर बड़ा बदलाव लाने वाली साबित होगी।