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Gen-Z के लिए बदली दलों की सियासी पढ़ाई, 18-32 वर्ष की पीढ़ी बन सकती है चुनावी राजनीति का सबसे बड़ा फोकस

जेन-ज़ी के लिए सियासी दलों की पढ़ाई बदल गई है। ऐसे में अगले लोकसभा चुनाव में 18-32 वर्ष की पीढ़ी चुनावी राजनीति का सबसे बड़ा फोकस बन सकती है।
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भारत

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Tanay Mishra

Aug 01, 2026

CJP Protest

सीजेपी विरोध प्रदर्शन (File Photo)

2029 का लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीति के लिए एक नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है। इस चुनाव में मुकाबला सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि जेन-ज़ी (Gen-Z) का भरोसा जीतने का भी होगा। यह वो चुनाव होगा, जिसमें 18-32 वर्ष आयु वर्ग की पीढ़ी की भागीदारी 25% वोटों से होगी। यानी हर चौथा वोट जेन-ज़ी का। इसी बदलते चुनावी गणित को देखते हुए बीजेपी (BJP), कांग्रेस (Congress) और क्षेत्रीय दल अपनी रणनीति में बड़े बदलाव कर रहे हैं। पारंपरिक रैलियों और भाषणों के साथ अब सोशल मीडिया, शॉर्ट वीडियो, पॉडकास्ट, इन्फ्लुएंसर नेटवर्क और युवा संवाद चुनावी अभियान का अहम हिस्सा बन चुके हैं।

राजनीतिक एक्सपर्ट्स का क्या है मानना?

राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह पीढ़ी जातीय या पारंपरिक राजनीतिक निष्ठाओं से ज़्यादा रोजगार, शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल अवसर और सरकार के प्रदर्शन जैसे मुद्दों पर फैसला करेगी। यही कारण है कि लगभग हर प्रमुख दल युवाओं के लिए अलग डिजिटल टीम, सोशल मीडिया कंटेंट और विशेष अभियान तैयार कर रहा है।

बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या?

बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती जेन-ज़ी तक अपनी बात पहुंचाने की है। इसकी वजह यह है कि 18 से 32 वर्ष आयु वर्ग के ज़्यादातर युवाओं ने राजनीतिक समझ विकसित करने के बाद केंद्र में मुख्यतः बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार ही देखी है। यह वर्ग पूर्ववर्ती सरकारों के कामकाज का प्रत्यक्ष अनुभव नहीं रखता। इसलिए तुलना के बजाय उसका आकलन मौजूदा सरकार के प्रदर्शन पर ज़्यादा आधारित होगा।

राजनीतिक दलों की तैयारी

बीजेपी: 'इंस्टा-फर्स्ट' रणनीति, मीम्स और जिम-कल्चर से कनेक्ट

बीजेपी ने पारंपरिक प्रेसनोट और भाषणों के बजाय 'इंस्टाग्राम-फर्स्ट' रणनीति पर फोकस शुरू कर दिया है। हाल ही में पेपर लीक और नौकरियों पर उठे सवालों के जवाब में बीजेपी ने औपचारिक जवाब देने के बजाय फ्रैंड्स, सिटकॉम, जिम-बैंटर और मीम फॉर्मेट में कंटेंट रिलीज़ किया। भारतीय जनता युवा मोर्चा को यूनिवर्सिटी परिसरों में जेन-ज़ी विद मोदी जैसे संवाद कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्र आंदोलन के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर छोटे वीडियो मैसेज शेयर कर रहे हैं।

कांग्रेसः 'परीक्षा पर चर्चा' से काउंटर और चुनाव लड़ने की उम्र 21 करने का दांव

कांग्रेस जेन-ज़ी के बीच पैठ बनाने के लिए युवाओं के रोजमर्रा के गुस्से विशेषकर भर्ती परीक्षाओं की अनिश्चितता और पेपर लीक को अपना मुख्य हथियार बना रही है। पार्टी राज्यों में छात्र संगठनों के साथ 'युवा संवाद' और पेपर लीक विरोधी रैलियाँ निकाल रही है। कांग्रेस शासित राज्यों के माध्यम से केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रही है कि विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष की जाए।

क्षेत्रीय दलः टेक-ऑपरेशन्स और डिजिटल इंफ्लुएंसर्स का सहारा

समाजवादी पार्टी

उत्तर प्रदेश में अपने सोशल मीडिया सेल का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया है। पुराने प्रवक्ताओं की जगह आईटी एक्सपर्ट्स और 25 साल से कम उम्र के युवाओं को आगे कर 'टेक-सेवी' रील्स बनाई जा रही हैं।

तमिलगा वेत्री कज़गम (टीवीके)

दक्षिण में अभिनेता विजय की नई पार्टी पूरी तरह से डिजिटल इंफ्लुएंसर्स, गेमिंग कम्युनिटीज़ और यूथ-नेटवर्क के सहारे खड़ी की जा रही है। पार्टी के जमीनी संगठन से ज्यादा जोर युवाओं के वॉट्सऐप ग्रुप्स और इंस्टाग्राम प्रोफाइल्स को एक्टिव करने पर है।

क्या बदला?

पहले बड़ी रैलियाँ, लंबे भाषण, पोस्टर-पर्चे, टीवी विज्ञापन ज़्यादा देखने को मिलते थे। अब इंस्टाग्राम रील्स, पॉडकास्ट, मीम्स, इन्फ्लुएंसर, वॉट्सऐप कम्युनिटी, लाइव डिजिटल संवाद जैसे उपायों पर फोकस किया जा रहा है।

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