
लोकसभा(फोटो-IANS)
Public Examinations Amendment Bill 2026: पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' को लेकर सोमवार को लोकसभा में जोरदार हंगामा हुआ। यह बिल लोकसभा में सरकार की ओर से पेश किया गया। उधर कांग्रेस ने विधेयक को नाकाफी बताते हुए सरकार पर छात्रों के साथ दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। विपक्ष के विरोध के बीच लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही शाम 5 बजे तक स्थगित कर दी, ताकि सरकार और विपक्ष के बीच विधेयक पर चर्चा के लिए सहमति बनाई जा सके।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' की आलोचना करते हुए कहा कि यह केवल 'मरहम-पट्टी' जैसा कदम है। उनके अनुसार यदि सरकार वास्तव में शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को लेकर गंभीर होती, तो वह ऐसा व्यापक विधेयक लाती जो पूरे शिक्षा तंत्र की समस्याओं का समाधान करता।
कांग्रेस नेता अजय राय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एक तरफ सरकार पेपर लीक रोकने के लिए नया कानून ला रही है, जबकि दूसरी ओर आंदोलन करने वाले छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही हैं और उन पर आपराधिक मामले चलाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार के दोहरे मापदंड को दिखाता है।
अजय राय ने कहा कि सरकार एक ओर पेपर लीक रोकने का विधेयक पेश कर रही है और दूसरी ओर छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और इससे यह संदेश जाता है कि सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है।
विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही शाम 5 बजे तक स्थगित कर दी। उन्होंने सरकार और विपक्ष को 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026' पर चर्चा के लिए आम सहमति बनाने का समय दिया।
केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' पेश किया। देशभर में नीट पेपर लीक विवाद और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर लाए गए इस विधेयक का उद्देश्य परीक्षा संबंधी अपराधों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
प्रस्तावित कानून के तहत हर राज्य में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। विधेयक में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के लिए अधिकतम 10 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं संगठित पेपर लीक गिरोहों पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
Updated on:
27 Jul 2026 04:15 pm
Published on:
27 Jul 2026 04:15 pm
