
फोटो में राहुल गांधी (सोर्स: ANI)
Rahul Gandhi on Women's Reservation Bill: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास नहीं पाया। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस बिल में राजनीति ज्यादा थी, असंवैधानिक ताकतों का इस्तेमाल किया। महिलाओं के नाम पर अंसवैधानिक तरीका अपनाया। उन्होंने सोशल मीडिया 'एक्स' पर अपने पोस्ट में लिखा, 'भारत ने देख लिया, इंडिया ने रोक दिया'। इतना ही नहीं, महिला आरक्षण बिल लोकसभा में गिरने पर राहुल गांधी ने विपक्ष की एकता के लिए अभिषेक बनर्जी को धन्यवाद दिया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा, 'यह संविधान पर आक्रमण था और इसे हमने हरा दिया है तो यह अच्छी बात है। हमने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह महिला बिल नहीं है, यह हिंदूस्तान का जो राजनीतिक ढांचा है, चुनावी ढांचा है, उसे बदलने की कोशिश है। यह हमने रोक दिया है। मैं प्रधानमंत्री से कह रहा हूं कि अगर आप महिला आरक्षण चाहते हैं तो 2023 का महिला आरक्षण बिल निकालिए, उसका क्रियान्वयन आज से करिए और पूरा विपक्ष 100% आपको समर्थन देगा और महिला आरक्षण को हम तत्काल लागू कराएंगे।'
वहीं,संविधान संशोधन(131वां संशोधन) बिल के लोकसभा में पारित न होने पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, 'महिला आरक्षण की बात नहीं थी ये लोकतंत्र की बात थी, देश की अखंडता की बात थी। हम कभी इससे सहमत नहीं हो सकते कि आप महिला आरक्षण को इस तरह परिसीमन से जोड़ें कि वो पुरानी जनगणना पर चले जिसमें OBC शामिल भी नहीं है। ये मुमकिन नहीं था कि ये बिल पारित हो। देश के लोकतंत्र के लिए, देश की अखंडता के लिए ये बड़ी जीत है।'
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, 'महिला विरोधी माइंटसेट की बात वो कह रहे हैं जिन्होंने हाथरस में कुछ नहीं किया, जिन्होंने उन्नाव में कुछ नहीं किया। जिन्होंने मणिपुर की महिलाओं के लिए कुछ नहीं किया, जिन्होंने खिलाड़ियों के लिए कुछ नहीं कहा...ये कह रहे हैं कि हमारा माइंडसेट महिला विरोधी है।'
लोकसभा में सरकार को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाने के कारण महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जानकारी दी कि इस विधेयक पर विचार करने के लिए हुए मत विभाजन में 298 सांसदों ने समर्थन में और 230 सांसदों ने विरोध में मतदान किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संख्या बल पर्याप्त न होने के चलते विधेयक आगे की प्रक्रिया में प्रवेश नहीं कर सका और प्रारंभिक स्तर पर ही यह अस्वीकृत हो गया। इसके बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा कि संबंधित अन्य दो विधेयकों को भी आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
Published on:
17 Apr 2026 09:21 pm
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