
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (फाइल फोटो - आईएएनएस)
प्रयागराज में राहुल गांधी के छात्र कार्यक्रम को लेकर महज 24 घंटे में दो बार फैसला बदला गया। जिस ग्राउंड पर 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का आयोजन होना था, वहां पहले अनुमति नहीं दी गई। फिर कुछ ही घंटों बाद शर्तों के साथ हामी भर दी गई।
यह घटना देश भर की राजनीति और प्रशासनिक फैसले दोनों को लेकर चर्चा का विषय बन गई है। दरअसल, केपी ट्रस्ट ने राहुल के कार्यक्रम को लेकर साफ मना कर दिया था। अनुमति नहीं देने की वजह में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 14 अगस्त 2025 को दिए गए एक आदेश का हवाला दिया गया था।
कोर्ट के आदेश में उक्त मैदान को सिर्फ खेल और शिक्षा से जुड़े कामों के लिए इस्तेमाल करने की बात कही गई है। ट्रस्ट ने साफ कहा कि इस मैदान पर राजनीतिक कार्यक्रम नहीं हो सकते।
साथ ही ट्रस्ट की ओर से कार्यक्रम की अनुमति नहीं देने की एक और वजह यह भी बताई गई कि हाल की बारिश के बाद मैदान में पानी भर गया है। हालांकि, 24 घंटे के अंदर स्थिति बदल गई। ट्रस्ट ने कानूनी सलाहकारों से बात की और फिर सशर्त अनुमति दे दी। अब कार्यक्रम हो सकता है, लेकिन दो शर्तें रखी गई हैं।
पहली, पढ़ाई और अकादमिक गतिविधियां किसी भी हाल में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। दूसरी, आयोजकों को जिला मजिस्ट्रेट से अलग से अनुमति लेनी होगी।यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठ रहा है कि एक दिन में क्या ऐसा हुआ जिससे सीधा इनकार सशर्त हामी में बदल गया।
इस पर ट्रस्ट का कहना है कि कानूनी राय लेने के बाद फैसला बदला गया है। उधर, आयोजक पक्ष का दावा है कि कार्यक्रम छात्रों से जुड़ा है और शिक्षा से संबंधित है, इसलिए अनुमति मिलनी चाहिए थी।
अब सियासी गलियारे में पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि यह राजनीतिक दबाव का नतीजा है। इस बीच, सत्ताधारी पक्ष के नेता इसे नियम-कानून का पालन बता रहे हैं। मैदान की हालत और अदालती आदेश दोनों पक्ष अपनी-अपनी सुविधा से पेश कर रहे हैं।
कार्यक्रम का नाम छत्रों की गूंज रखा गया है। इसमें राहुल गांधी छात्रों से संवाद करने वाले हैं। बता दें कि जिस ग्राउंड पर आयोजन होना है, वहां प्रशासनिक अनुमति और मैदान मालिक की मंजूरी दोनों जरूरी होती हैं।
इस बार दोनों के बीच तालमेल बिठाने में एक दिन लग गया। अब जिला प्रशासन की अनुमति पर निर्भर करेगा कि कार्यक्रम तय समय पर होता है या नहीं। ट्रस्ट ने अपनी जिम्मेदारी से किनारा करते हुए अंतिम फैसला प्रशासन पर डाल दिया है।
Updated on:
07 Aug 2026 08:46 am
Published on:
07 Aug 2026 08:41 am
