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ज्ञानेश कुमार को बड़ी राहत: राज्यसभा के सभापति का कड़ा फैसला- ‘नहीं चलेगा महाभियोग’; विपक्ष को लगा झटका

CEC Gyanesh Kumar News: राज्यसभा सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने Judges (Inquiry) Act, 1968 की धारा 3 के तहत नोटिस और संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत समीक्षा के बाद फैसला लिया कि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का कोई आधार नहीं है।

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Gyanesh Kumar

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

Rajya Sabha Chairman Decision: राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाए गए महाभियोग नोटिस को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह फैसला विपक्षी दलों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। 12 मार्च 2026 को 193 सांसदों (लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63) द्वारा हस्तारित यह नोटिस स्वतंत्र भारत के इतिहास में किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पहला महाभियोग प्रयास था।

राज्यसभा सभापति ने खारिज किया महाभियोग नोटिस

राज्यसभा सभापति ने Judges (Inquiry) Act, 1968 की धारा 3 के तहत नोटिस और संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत समीक्षा के बाद फैसला लिया कि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का कोई आधार नहीं है। सभापति ने स्पष्ट कहा कि महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पर्याप्त वजह नहीं मिली। इससे विपक्ष द्वारा शुरू की गई पूरी कार्रवाई रुक गई है।

विपक्षी सांसदों ने ज्ञानेश कुमार पर लगाए थे सात गंभीर आरोप

विपक्षी सांसदों ने नोटिस में ज्ञानेश कुमार पर सात गंभीर आरोप लगाए थे। इनमें पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण, सिद्ध कदाचार, चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालना और बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना शामिल था। खासतौर पर बिहार में मतदाता सूचियों की विशेष गहन समीक्षा (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे, जिसमें कई योग्य मतदाता सूची से बाहर हो गए। विपक्ष ने दावा किया कि CEC ने कुछ राजनीतिक दलों के पक्ष में रवैया अपनाया और संविधान के अनुच्छेद ३२४(५) तथा संबंधित कानूनों का उल्लंघन किया।

नोटिस संविधान के अनुच्छेद 324(5), Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023 और Judges (Inquiry) Act, 1968 के प्रावधानों के तहत दिया गया था। विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का भी हवाला दिया था।

विपक्ष और सरकार के बीच तनाव

यह घटना चुनाव सुधार और संस्थागत विश्वास के मुद्दे पर विपक्ष और सरकार के बीच चल रहे तनाव को दर्शाती है। विपक्ष ने महाभियोग की मांग को लोकतंत्र की रक्षा से जोड़ा था, जबकि सभापति के फैसले के बाद सत्तापक्ष ने इसे विपक्ष की निराशा और राजनीतिक साजिश बताया है।
राज्यसभा सभापति के इस फैसले से मुख्य चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर उठे सवालों को एक तरह से खारिज कर दिया गया है। अब विपक्ष के पास आगे कानूनी या संसदीय विकल्प सीमित रह गए हैं।