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RBI ने बैंकों के लिए प्रस्तावित किए नए कैपिटल नियम, काउंटरपार्टी रिस्क कवर करना होगा जरूरी

RBI New Capital Rules: RBI ने बैंकों के लिए नए कैपिटल नियम प्रस्तावित किए हैं। इसका मकसद फाइनेंशियल कॉन्ट्रैक्ट और काउंटरपार्टी रिस्क से होने वाले संभावित नुकसान से बैंकों को सुरक्षित रखना है।
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भारत

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Saurabh Mall

Aug 08, 2026

rbi updates

बैंकों के लिए RBI का बड़ा कदम। जानिए क्या है नया प्रस्ताव? (इमेज सोर्स: ANI)

RBI Banking Rules CVA Framework: बैंकों के कामकाज में जोखिम हमेशा बना रहता है। खासकर तब, जब वे किसी दूसरी संस्था के साथ वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट करते हैं। ऐसे कॉन्ट्रैक्ट में दूसरी पार्टी की आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर बैंक को नुकसान हो सकता है। इसी जोखिम को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नया प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत बैंकों को कुछ वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े संभावित नुकसान के लिए पर्याप्त कैपिटल रखना होगा। RBI का यह कदम बैंकों को वित्तीय झटकों से बचाने की दिशा में है।

2011 के CVA फ्रेमवर्क की जगह आएगा नया नियम

RBI का नया प्रस्ताव मौजूदा ‘क्रेडिट वैल्यूएशन एडजस्टमेंट’ (CVA) फ्रेमवर्क की जगह लेगा। यह फ्रेमवर्क साल 2011 में जारी किया गया था।बता दें ‘CVA’ का इस्तेमाल काउंटरपार्टी से जुड़े जोखिम को मापने के लिए किया जाता है। आसान भाषा में समझें तो अगर किसी डेरिवेटिव या दूसरे वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट की दूसरी पार्टी आर्थिक रूप से कमजोर होती है, तो कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू प्रभावित हो सकती है। ऐसे में बैंक को नुकसान उठाना पड़ सकता है। नए नियम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बैंक के पास इस तरह के नुकसान को झेलने के लिए पर्याप्त पूंजी मौजूद हो। यह प्रस्ताव अपडेटेड इंटरनेशनल बैंकिंग स्टैंडर्ड के अनुरूप तैयार किया गया है।

कमजोर क्रेडिट वाली कंपनियों पर ज्यादा रिस्क वेट

नए फ्रेमवर्क में काउंटरपार्टी के सेक्टर और उसकी क्रेडिट क्वालिटी को अहम माना गया है। अगर किसी काउंटरपार्टी की क्रेडिट क्वालिटी कमजोर है या उसकी कोई रेटिंग नहीं है, तो उस पर ज्यादा रिस्क वेट लागू होगा। यानी बैंक को ऐसे मामलों में ज्यादा कैपिटल रखना पड़ सकता है। मसलन, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के लिए मजबूत क्रेडिट क्वालिटी पर रिस्क वेट 5 फीसदी प्रस्तावित है। वहीं कमजोर या बिना रेटिंग वाली संस्था के लिए यह 12 फीसदी होगा। वहीं एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, एग्रीकल्चर और माइनिंग जैसी कंपनियों के लिए यह वेट 3 फीसदी और 7 फीसदी रखा गया है। इससे साफ है कि ज्यादा जोखिम वाली काउंटरपार्टी के लिए बैंक को ज्यादा सुरक्षा पूंजी रखनी होगी।

छोटे डेरिवेटिव पोर्टफोलियो वाले बैंकों को राहत

RBI ने कुछ बैंकों के लिए आसान कैलकुलेशन मेथड का विकल्प भी प्रस्तावित किया है। यह सुविधा उन बैंकों को मिल सकती है, जिनके ऐसे डेरिवेटिव्स की कुल रकम 10 लाख करोड़ रुपये या उससे कम है, जो सेंट्रल क्लियरिंग सिस्टम से क्लियर नहीं हुए हैं। हालांकि, RBI को यह विकल्प रोकने का अधिकार होगा। अगर उसे लगे कि बैंक की डेरिवेटिव पोजिशन में जोखिम बहुत ज्यादा है, तो वह सरल तरीका इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दे सकता।

बैंकों को स्टैंडर्ड कैलकुलेशन मेथड के फुल और कम किए गए वर्जन में से चुनने का विकल्प भी मिलेगा। कम किया गया वर्जन अपेक्षाकृत कम एडवांस्ड बैंकों के लिए होगा। प्रस्तावित नियम कमर्शियल बैंकों पर लागू होंगे। हालांकि, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और लोकल एरिया बैंक इनके दायरे से बाहर रहेंगे। RBI ने नए प्रस्ताव पर 28 अगस्त 2026 तक सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित नया फ्रेमवर्क 1 अप्रैल 2027 से लागू किया जा सकता है।