
Parliament Monsoon Session :संबित पात्रा ने विपक्ष को घेरा, राहुल गांधी की चुप्पी पर उठाए सवाल (फोटो सोर्स: @ani_digital)
Karnataka Police Constable Paper Leak: संसद के मॉनसून सत्र में लगातार हो रहे हंगामे और कामकाज प्रभावित होने के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और INDIA गठबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि संसद के संचालन पर हर दिन करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण न तो प्रश्नकाल सुचारु रूप से चल पा रहा है और न ही महत्वपूर्ण विधेयकों पर गंभीर चर्चा हो रही है।
पात्रा ने कहा कि लोकतंत्र में संसद बहस और जवाबदेही का सबसे बड़ा मंच है, लेकिन मौजूदा हालात में जनता से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पा रही है। उनका कहना था कि संसद का समय राजनीतिक टकराव की भेंट चढ़ रहा है, जिसका नुकसान सीधे देश की जनता को उठाना पड़ रहा है।
बीजेपी सांसद ने अपने बयान में कर्नाटक पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था और सरकार से जवाब मांगा था। पात्रा का आरोप है कि जब इस मामले में राज्य सरकार से जिम्मेदारी तय करने की बात उठी तो उचित जवाब देने के बजाय विवादित बयान सामने आए।
उन्होंने दावा किया कि इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, ने अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है। बीजेपी का कहना है कि विपक्ष दूसरे राज्यों के मुद्दों पर मुखर रहता है, लेकिन कांग्रेस शासित राज्यों में उठने वाले विवादों पर चुप्पी साध लेता है।
प्रियंक खरगे का विवादित बयान: "अगर मेरा इस्तीफा चाहिए, तो छात्रों को पहले 25 दिन तक भूख हड़ताल पर बैठने दो। जब स्थिति बेकाबू होगी तो हम उन पर लाठीचार्ज करेंगे, और उसके बाद ही मैं अपने इस्तीफे के बारे में सोचूंगा।"
मॉनसून सत्र की शुरुआत से ही विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। विपक्ष कई राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि सदन की कार्यवाही बाधित करने के बजाय नियमों के तहत चर्चा होनी चाहिए। इसी खींचतान के कारण कई बार प्रश्नकाल और विधायी कार्य प्रभावित हुए हैं।
संसदीय परंपरा के अनुसार प्रश्नकाल को सरकार से जवाबदेही तय करने का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है। यदि यह लगातार बाधित होता है तो सांसदों को जनता से जुड़े सवाल उठाने का अवसर भी सीमित हो जाता है।
संसद में लंबित कई विधेयकों और नीतिगत प्रस्तावों पर चर्चा का समय भी प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार गतिरोध की स्थिति बनने से कानून बनाने की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों में देरी हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति दोनों जरूरी हैं, लेकिन संसद की कार्यवाही पूरी तरह बाधित होने से सरकार और विपक्ष दोनों की जवाबदेही पर सवाल उठते हैं। जनता की अपेक्षा रहती है कि दोनों पक्ष राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सदन को सुचारु रूप से चलाने का रास्ता निकालें।
मॉनसून सत्र के शेष दिनों में सरकार की कोशिश लंबित विधेयकों को पारित कराने की रहेगी, जबकि विपक्ष अपने उठाए गए मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति पर कायम है। ऐसे में आने वाले दिनों में सदन का माहौल कैसा रहेगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। संसद की कार्यवाही सामान्य होती है या राजनीतिक टकराव और तेज होता है, यह सत्र के अगले चरण की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
Updated on:
04 Aug 2026 10:33 am
Published on:
04 Aug 2026 10:11 am
