
कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Photo - ANI)
Shashi Tharoor on Ayatollah Ali Khamenei: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या पर भारत द्वारा समय रहते शोक व्यक्त करना सबसे उचित कदम होता, भले ही अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई की निंदा नहीं की गई होती। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के भीषण संघर्ष के दौरान सरकार को संयम के साथ काम करना चाहिए। थरूर ने जोर देकर कहा कि यदि कांग्रेस की सरकार होती, तब भी वह उन्हें यही सलाह देते।
ईरान के खामेनेई की हत्या पर भारत को शोक संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी या नहीं, ANI के इस सवाल के जवाब में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, 'मैं आलोचकों से सहमत हूं। संघर्ष के पहले ही दिन, जब सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की हत्या हुई थी, हमें शोक संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी। यही सबसे उचित होता। देश में उनकी भूमिका को देखते हुए यही सही कदम होता।'
इस दौरान कांग्रेस सांसद ने 2024 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में पूर्व ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम राईसी की मृत्यु के बाद भारत के रुख को याद दिलाया। थरूर ने कहा, 'जब राष्ट्रपति रायसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हुई थी, तो हमने तुरंत राजकीय शोक घोषित किया और संवेदनाएं व्यक्त की थीं। हालांकि, मुझे खुशी है कि जब दिल्ली में ईरानी दूतावास ने शोक पुस्तिका खोली, तो हमारे विदेश सचिव को तुरंत संवेदना व्यक्त करने के लिए भेजा गया।'
उन्होंने आगे कहा कि संवेदना और निंदा में अंतर होता है। अगर आप राजनीतिक रूप से अमेरिकी- इजरायली हमले की निंदा नहीं करना चाहते, तो ठीक है। लेकिन संवेदना शोक संतप्त परिवार, ईरान की सरकार और जनता के प्रति सहानुभूति व्यक्त करने का एक तरीका है। यह हम कर सकते थे।'
जब उनसे एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित उनके लेख के बारे में पूछा गया, जो भारत के राजनयिक कदमों पर उनकी पार्टी (कांग्रेस) के रुख से थोड़ा अलग था, तो उन्होंने इस पर कहा कि विपक्ष में होने के नाते कोई नैतिक रुख ले सकता है, लेकिन उन्होंने सरकार को सलाह दी कि उसे 'ताकत के रूप में संयम' का अभ्यास करना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने कहा, 'सोनिया गांधी और विपक्ष के अन्य नेताओं ने जो कहा है, मैं उसकी पूरी सराहना करता हूं क्योंकि विपक्ष के रूप में हम एक नैतिक रुख ले सकते हैं। मेरा लेख इस बारे में अधिक है कि सरकार को क्या करना चाहिए। सच कहूं तो, अगर मैं कांग्रेस सरकार को भी सलाह दे रहा होता, तो मेरी सलाह इस समय संयम से काम लेने की होती। संयम आत्मसमर्पण नहीं है, बल्कि यह एक ताकत है; यह दिखाने का एक तरीका है कि हम जानते हैं कि हमारे हित क्या हैं और हम उनकी रक्षा के लिए सबसे पहले कार्य करेंगे।'
Published on:
20 Mar 2026 12:57 pm
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