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‘डर किस बात का, Y-Plus सिक्योरिटी की जरूरत क्यों पड़ी?’ शिवसेना उद्धव गुट ने बागी सांसदों पर साधा निशाना

Shiv Sena UBT Defection Controversy: शिवसेना (UBT) की स्पोक्सपर्सन सुषमा अंधारे ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जनता उनके साथ है, तो फिर Y-Plus सुरक्षा की जरूरत आखिर क्यों पड़ रही है?

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मुंबई

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Saurabh Mall

Jun 21, 2026

Shiv Sena UBT Spokesperson Sushma Andhare

शिवसेना यूबीटी प्रवक्ता सुषमा अंधारे (सोर्स: ANI)

Shiv Sena UBT Spokesperson Sushma Andhare: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। शिवसेना (UBT) पार्टी की प्रवक्ता सुषमा अंधारे ने हाल ही में पार्टी छोड़ने वाले सांसदों पर निशाना साधते हुए बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने पूछा कि अगर जनता वास्तव में उनके साथ थी, तो फिर उन्हें Y-Plus सुरक्षा की जरूरत क्यों पड़ गई? पुणे में मीडिया से बातचीत के दौरान अंधारे ने बागी नेताओं के दावों पर सवाल उठाए और कहा कि जनता का समर्थन होने का दावा करने वाले नेताओं का व्यवहार कुछ और ही कहानी बता रहा है।

जनता के समर्थन के दावे पर उठाए सवाल

सुषमा अंधारे ने सांसद ओमराजे निंबालकर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें उनके प्रति सहानुभूति है। उन्होंने कहा कि ओमराजे ने पिछले दो दशकों से अपने पिता स्वर्गीय पवनराजे निंबालकर के लिए संघर्ष किया है। ऐसे में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम से उनका आहत होना स्वाभाविक है।

हालांकि, अंधारे ने पार्टी छोड़ने वाले अन्य नेताओं पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ नेता अपने राजनीतिक फैसलों की वजह से जनता से दूर हो गए हैं। यही कारण है कि वे अब परेशान और दबाव में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर सच में जनता उनके साथ होती, तो पार्टी छोड़कर जाने वाले छह सांसदों को Y-Plus सिक्योरिटी की जरूरत नहीं पड़ती।

बागी सांसदों को दलबदल कानून की कार्रवाई का खतरा

इस विवाद के बीच शिवसेना (UBT) ने अपने गैरहाजिर सांसदों के खिलाफ भी सख्त रुख अपना लिया है। पार्टी के चीफ व्हिप अनिल देसाई ने अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

नोटिस में सांसदों से 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया है। पार्टी ने साफ कहा है कि जवाब नहीं मिलने पर इसे स्वेच्छा से पार्टी छोड़ना माना जाएगा। इसके बाद दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

दरअसल, नई दिल्ली में हुई संसदीय दल की बैठक में नौ में से केवल तीन सांसद ही शामिल हुए थे। छह सांसदों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया। इस बीच दावा किया जा रहा है कि कई सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में हैं। यही वजह है कि महाराष्ट्र की राजनीति में नए सियासी विभाजन की चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। अब सभी की नजर पार्टी की अगली रणनीति और बागी सांसदों के जवाब पर टिकी हुई है।