
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी। (फोटो- AI)
वो सिंगूर, जिसने 2006-08 के किसान आंदोलन के जरिए ममता बनर्जी को सत्ता की राह दिखाई थी, आज उसी जगह उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस हार के कगार पर खड़ी नजर आ रही है। 2026 विधानसभा चुनाव के मतगणना के रुझानों में बीजेपी के अरूप कुमार दास सिटिंग विधायक बेचराम मन्ना से आगे हैं।
9 राउंड की काउंटिंग के बाद भाजपा के अरूप कुमार को अब तक 49753 वोट मिले हैं। जबकि दूसरे नंबर पर बेचराम मन्ना हैं, जिन्हें अब तक 36345 वोट मिले हैं। हालांकि, अब भी 12 राउंड की काउंटिंग बाकी है। इस बीच, कोई भी आगे-पीछे हो सकता है।
साल 2008 में टाटा नैनो प्रोजेक्ट के खिलाफ ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए आंदोलन ने पूरे बंगाल की राजनीति बदल दी थी। वाम मोर्चा की 34 साल पुरानी सरकार का अंत हुआ और 2011 में ममता सत्ता में आईं।
सिंगूर उस वक्त टीएमसी का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया था। लेकिन अब वही इलाका नाराजगी का केंद्र बनता दिख रहा है। आज मतगणना के दौरान सिंगूर में हालात काफी कड़े रहे।
शुरुआती राउंड में कभी टीएमसी आगे रही, तो कभी बीजेपी। एक समय बीजेपी के अरूप कुमार दास 600 से ज्यादा वोटों से आगे चल रहे थे। बेचराम मन्ना, जो खुद सिंगूर आंदोलन के चेहरे रहे हैं और मंत्री भी हैं, इस बार अपनी ही सीट बचाने में जूझते नजर आ रहे हैं।
मीडिया चैनल से बातचीत के दौरान स्थानीय लोगों को यह कहते हुए सुना गया था कि आंदोलन के बाद जमीन तो बच गई, लेकिन नौकरियां और विकास कहां है? खाली पड़ी फैक्टरी की जमीन अब जंगली घास और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का गवाह बनी हुई है।
युवा रोजगार की तलाश में हैं, पुराने किसान अभी भी पुरानी यादों में जी रहे हैं, लेकिन मध्यम वर्ग दोनों तरफ से ठगा महसूस कर रहा है। 2021 के चुनाव में मन्ना ने अच्छे मार्जिन से जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार हवा बदली हुई लग रही है।
पूरे हुगली जिले और खासकर सिंगूर में विकास बनाम राजनीतिक वादों की लड़ाई साफ दिख रही है। प्रधानमंत्री मोदी समेत बीजेपी नेताओं ने भी सिंगूर को लेकर खास फोकस किया था। उन्होंने कहा था कि सच्चा परिवर्तन तभी होगा जब यहां उद्योग आएंगे और 'महाजंगल राज' खत्म होगा।
Published on:
04 May 2026 03:29 pm
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